. विवेचना -विकसित भारत के दूरगामी उद्देश्यों की सोच पर आगे बढ़ रहा किशनगंज जिला
=शहर से लेकर गांवों तक जारी है महिलाओं का अभियान
छूटे हुए परिवारों को समूह से जोड़ने का चल रहा कार्य
जागरुक महिलाएं समूह निर्माण का कर रहीं कार्य
वीरेंद्र चौहान, नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज , 6जुलाई।
गरीब ग्रामीण व शहरी परिवार, स्वयं सहायता समूह से जुड़कर विकसित भारत के
लाभ ले सकते हैं।किशनगंज जिला में छूटे हुए ग्रामीण और शहरी परिवारों को जोड़ने के लिए सघनता से समूह निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस प्रयास से छूटे हुए परिवार, समूह से जुड़कर, आर्थिक प्रगति के विभिन्न लाभ ले सकते हैं।सातों प्रखंड में जीविका की सामुदायिक संसाधन सेवी एवं सामुदायिक उत्प्रेरक जीविका दीदियाँ, घर – घर जाकर सर्वेक्षण कर रही हैं। जीविका किशनगंज के प्रभारी जिला परियोजना प्रबंधक सुफल कुमार झा ने बताया कि सातों प्रखंड में छूटे हुए परिवार को चिन्हित कर, स्वयं सहायता समूह से उनका जुड़ाव किया जा रहा है. स्वयं सहायता समूह से सिर्फ महिला सदस्य का ही जुड़ाव किया जाता है. परिवार से सिर्फ एक महिला सदस्य, समूह से जुड़ सकती हैं. पहचान और स्थायी निवास के रूप में आधार कार्ड व राशन कार्ड देकर समूह से जुड़ा जा सकता है। 18 से 60 वर्ष उम्र की महिलाएँ समूह से जुड़ सकती हैं. इस प्रयास में अब तक ग्रामीण क्षेत्र में 505 स्वयं सहायता समूह का निर्माण किया गया है। जिसमें छूटे हुए पांच हजार से अधिक परिवारों को समूह से जोड़ा गया है। वहीं, शहरी क्षेत्र में 46 स्वयं सहायता समूह बनाया गया है। जिससे लगभग 400 से अधिक छूटे हुए परिवार समूह से जुड़े हैं.

कैप्शन – बिहार, किशनगंज जिले में समूह के सदस्यों के साथ बैठक करतीं जीविका से जुड़ी महिलाएं -नजरिया न्यूज
जीविका के माध्यम से किशनगंज जिला के गरीब ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक – सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं।स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं।समूह से कम ब्याज दर पर ऋण लेकर, स्वरोजगार कर रही हैं।स्वयं सहायता समूह के विभिन्न निधि से जीविका दीदियों को ऋण दिया जाता है।साथ ही बैंक से समूह का जुड़ाव कर, ऋण दिया जाता है।आवश्यकता अनुसार जीविका दीदियाँ, इसका इस्तेमाल अपने स्वरोजगार के लिए करती हैं। जीविका दीदियों के क्षमतावर्धन के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाते हैं।जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक लगभग 20 हजार 37 स्वयं सहायता समूह ( SHG ) का निर्माण किया गया है।इन समूह से जुड़े 2 लाख 30 हजार से अधिक परिवार का क्षमतावर्धन कर उनके लिए जीविकोपार्जन का साधन, विकसित किये जा रहे हैं I वहीं, शहरी क्षेत्रों में लगभग 1 हजार 29 स्वयं सहायता समूह का निर्माण किया गया है।जिससे 11 हजार से अधिक परिवार का जुड़ाव हुआ है। इन सामुदायिक संगठनों के माध्यम से जीविका दीदियों को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। समूह से जुड़कर महिलाओं का क्षमतावर्धन हो रहा है। जीविका दीदियाँ स्वरोजगार के साधन विकसित कर परिवार की तरक्की कर रही हैं। सप्ताहिक बैठक, बचत, आपसी लेन – देन, ससमय ऋण की वापसी, और लेखांकन गतिविधियाँ खुद से करके, जीविका दीदियाँ स्वयं से स्वयं का विकास कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।इन गतिविधियों से वे पारदर्शी एवं दूरगामी उद्देश्यों को पूरा कर रही हैं।























