जानवरों का टीकाकरण, बंध्याकरण एवं कृमि का उपचार करके जिंदगी की प्रेरणादाई दिशा दे रहीं महिलाएं
महिलाओं को घर पर काम और बाजार जैसी सुविधाएं उपलब्ध करके 1947 से पहले अमेरिका और चीन की इकोनॉमी को पीछे छोड़ सकता देश
वीरेंद्र चौहान, नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज, 01जून
बिहार ने प्रदेश के किशनगंज जिले में महिला संवाद कार्यक्रम विश्व के ख्यातिलब्ध विश्वविद्यालयों को हुनर और ज्ञान सिखाने में मात दे रहा है। ऐसी ही प्रेरणा की नायिका बनकर शांति कुमारी सामने आईं हैं।
कोचाधामन पंचायत के पाटकोई कला पंचायत की शांति कुमारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पशु सखी के रूप में काम करती हैं।बकरा – बकरियों को कृमिनाशक दवा पिलाकर, टीकाकरण, बंध्याकरण करके महीने में 15 हजार रुपये से अधिक की आमदनी करती हैं।महिला संवाद कार्यक्रम उन्होंने बताया कि वे अपने पंचायत में लगभग तीन सौ बकरीपालक परिवारों को सेवाएं दे रही हैं। पूर्व में आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। घर – गृहस्थी तक जीवन सीमित था। स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर पशु सखी का हुनर प्राप्त किया। पशु सखी की सेवाएं देना शुरू किया। पशुसेवा ने नई पहचान दी। आज मैं अपने जीवन से संतुष्ट हूं।
इसी पंचायत की प्रतिमा देवी ने बताया कि, वे हीना जीविका स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर खेती कर रही हैं। अन्न और सब्जी का उत्पादन करती हैं। प्रतिदिन अच्छी आमदनी हो जाती है।
समूह से एक रुपये अल्प ब्याज दर पर आसानी से ऋण मिल गया था।

किशनगंज, बिहार -महिला संवाद कार्यक्रम में संवाद करतीं महिलाएं -नजरिया न्यूज
जिंदगी जीने की राह में बांधाएं:
प्रधानमंत्री आवास बनाने में सरकार से मिल रही राशि बहुत ही कम है। रहने लायक प्रधानमंत्री आवास बनाने में सरकार द्वारा दी जा रही राशि बहुत कम है।कर्ज लेकर प्रधानमंत्री आवास का कार्य पूर्ण करना पड़ता है। एक कमरे का आवास बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास की राशि दोगुना करने की जरूरत है। यह आकांक्षा व्यक्त करते हुए महिला संवाद कार्यक्रम में किशनगंज सदर प्रखंड के गाछपाड़ा पंचायत की नीलम ने कहा: आवास योजना की राशि में वृद्धि करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि घर बनाने की सामग्री मूल्य में कई गुना की वृद्धि से प्रधानमंत्री आवास की लागत बहुत बढ़ गई है।सरकार को योजना की राशि बढ़ानी चाहिए। इन्होंने रसोई एलपीजी गैस की कीमत कम करने की भी मांग की।
ठाकुरगंज प्रखंड के कुकुरबाघी पंचायत की किरण देवी ने अपनी आकांक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि गांव – टोलों की सड़कों की मरम्मती का काम नियमित रूप से होना चाहिए। सड़कों में गड्ढे जिंदगी को दुरुह बना रहे हैं।
इसी पंचायत की सीता देवी ने स्वास्थ्य पोषण और स्वच्छता के क्षेत्र में कार्य की आकांक्षा व्यक्त की। आँगनबाड़ी केंद्र पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिल रही सुविधाओं को बढ़ाने का सुझाव दिया है।
फिलहाल महिलाओं को उनके घर पर ही काम और बाजार की सुविधाएं देकर हुनरमंद भारत का निर्माण किया जा सकता है। अमेरिका और चीन की इकोनॉमी से आगे निकलने के लिए महिलाएं कमर कसकर तैयार हैं। सरकार अपनी नीतियों में सुधार करके 1947में प्राप्त होने वाले लक्ष्य को उससे बहुत पहले प्राप्त करने कि दिशा में बढ़ सकता है।























