सभी सीएचओ को मानसिक रोगों के उपचार के लिए किया जा रहा प्रशिक्षित
-जीवन के प्रति सकारात्मक रवैया अपना कर हर तरह के तनाव व चिंता से बचाव संभव
अररिया, 7 फरवरी ।
स्वस्थ व खुशहाल जीवन के लिये किसी व्यक्ति का मानसिक तौर पर स्वस्थ होना जरूरी है। मानसिक विकार से जुड़े मामले देश में तेजी से बढ़ रहे हैं। हालिया अध्ययनों में पाया गया है कि 15 साल से कम आयु के बच्चे भी तेजी से इसके शिकार हो रहे हैं। वर्तमान जीवन शैली, नशापान, अव्यवस्थित दिनचर्या व अनियमित खान पान मानसिक विकारों का प्रमुख कारण माना जाता है। व्यक्ति विशेष के सामाजिक व आर्थिक हालात भी इससे जुड़ी जोखिमों को बढ़ाता है। मानसिक विकार से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग इस पर प्रभावी नियंत्रण संबंधी उपायों की मजबूती के प्रयासों में जुटा है। विभाग प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान व इसका स्थाई निदान को लेकर जरूरी पहल कर रहा है। इसे लेकर सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में अवस्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर मानसिक रोगों की जांच व उपचार संबंधी इंतजाम सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिये वेलनेस सेंटरों पर कार्यरत सभी सीएचओ को इसे लेकर विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया जा रहा है।
सभी सीएचओ को ऑनलाइन दिया जा रहा प्रशिक्षण
जिला कार्यक्रम समन्वयक राकेश कुमार ने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सभी सीएचओ को स्वास्थ्य विभाग द्वारा मानसिक विकार की पहचान व उपचार से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ये प्रशिक्षण एनआईएमएचएएनएस के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध दिया जा रहा है. इसके लिये सीएचओ के प्रत्येक बैच के लिये दो-दो अवधि का सत्र निर्धारित है। प्रत्येक सप्ताह दो सत्र कुल 06 सत्र में ये प्रशिक्षण पूरा किया जाना है. प्रशिक्षण सत्र अपराह्न 2.00 बजे से 04.00 बजे तक संचालित है. उन्होंने कहा कि हेल्थ एंड वेलनेस स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं की उपलब्धता आम लोगों के लिये बेहद फायदेमंद साबित होगा. इससे मानसिक रोगों के समय पर पहचान व इलाज संभव हो सकेगा.
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच होगी आसान
जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम संतोष कुमार ने बताया कि भागदौड़ से भरी इस जिंदगी में तनाव प्रबंधन एक गंभीर चुनौती बन कर उभर रहा है। अत्यधिक तनाव हमारे सोचने, समझने की क्षमता को प्रभावित करता है। हमारे दैनिक व्यवहार में भी इसका असर दिखता है। किसी की संगति से बचना, अकेले रहने की आदत, अत्यधिक चिंता, बहुत अधिक क्रोध व झुंझलाहट, मूड में तुरंत बदलाव, हमेशा दुखी रहना किसी व्यक्ति में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या को इंगित करता है। एचडब्ल्यूसी स्तर पर इससे जुड़ी सेवा उपलब्ध होने से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी.
रोग नियंत्रण व उपचार सेवाओं को मिलेगी मजबूती
सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य किसी व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, सामाजिक सहित समग्र व्यवहार को नियंत्रित करता है। ऐसी परिस्थिति बनने पर तत्काल किसी मनोचिकित्सक की देखरेख में जरूरी परामर्श व इलाज जरूरी होता है। भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव प्रबंधन गंभीर एक गंभीर चुनौती बन कर उभर रहा है. लिहाजा इस पर प्रभावी नियंत्रण संबंधी उपायों की मजबूती जरूरी है. वेलनेस सेंटरों पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का संचालन शुरू होने से किसी भी तरह के मानसिक विकार से पीड़ित व्यक्ति का समुचित इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगा. इससे रोग नियंत्रण संबंधी उपायों को मजबूती मिलेगी।























