-14 साल से ऊपर के मरीजों ही दी जाएगी दवा
-छह महीने है दवा की डोज
मुजफ्फरपुर। जिले में टीबी एमडीआर मरीजों के उपचार में नया अध्याय जुड़ा है। नोडल डीआरटीबी सेंटर एसकेएमसीएच से शुक्रवार को नई रीजीम बी पाल एम की शुरुआत हुई। शुरुआत के दौरान डीआरटीबी सेंटर के एमडीआर मरीजों को एसकेएमसीएच की प्राचार्य डॉ आभा रानी सिन्हा, अधीक्षक डॉ विभा रानी, टीबी एवं चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ शैलेन्द्र कुमार और जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ सीके दास ने दवाई की डोज देकर की। डॉ दास ने बताया कि यह नई रीजीम बी पाल एम दवा छह महीने का कोर्स है। इसे 14 वर्ष से ऊपर के लोगों को ही दिया जाएगा। डॉ दास ने बताया कि टीबी उन्मूलन के लिए जिला देश के साथ खड़ा है। हम टीबी मरीजों की खोज के लिए लगातार अपनी स्क्रीनिंग को बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2024 में जिले में करीब 206 एमडीआर मरीज थे। फिलहाल जिले में लगभग 250 मरीज एमडीआर के हैं।
इस मौके पर डॉ शैलेन्द्र ने बताया की एमडीआर के उपचार में आने वाली यह नई रीजीम काफी असरदार है। एमडीआर टीबी की घातक अवस्था है। बी पाल एम को देने के पहले मरीज की अनेक तरह की जांच होती है। इसके बाद ही दवा मरीजों को दी जाती है। जिन मरीजों को दवा दी जाती है उनके डोज को प्रतिदिन दो आधार पर ट्रेस किया जाता है। इनमें पहला होम विजिट और दूसरा डिजिटल एढेरेंस सिस्टम है। मौके पर एसकेएमसीएच के मेडिसिन विभाग के डॉ सतीश कुमार सिंह, डॉ सुनील कुमार, डॉ विजय सिंह, सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार सिंह, टीबी एवं चेस्ट विभाग के डॉ अमनेन्दु कुमार, डॉ निभा कुमारी, डॉ स्वाती रानी, एनटीईपी के जिला कोऑर्डिनेटर विजय कुमार ठाकुर, डॉट्स प्लस वार्ड के सिस्टर इंचार्ज अनामिका कुमारी, आई सी एन इंचार्ज महावीर सिंह राठौर, पेशेंट सेफ्टी इंचार्ज नूपुर श्रीवास्तव, सांख्यिकी सहायक अविनाश कुमार, रामाधार राम सहित अन्य लोग मौजूद थे।
गलत तरीके से दवाओं के सेवन से हो सकता है एमडीआर:
एमडीआर टीबी की समस्या टीबी के मरीजों में इलाज के दौरान गलत तरीके से दवाओं के सेवन के कारण भी होती है। जब मरीज टीबी का इलाज करा रहा होता है उस दौरान टीबी की दवाओं का सही तरीके से सेवन न होने या दुरुपयोग होने की वजह से एमडीआर टीबी हो जाता है।
इस समस्या में मरीजों के शरीर में मौजूद ट्यूबरक्लोसिस के बैक्टीरिया दवाओं के प्रति इनते रेजिस्टेंट हो जाते हैं कि इनपर दवाओं का असर बिल्कुल भी नहीं होता है। इसके अलावा एमडीआर टीबी का दूसरा सबसे बड़ा कारण एमडीआर मरीज के संपर्क में आना है। ऐसे मरीज जो एमडीआर टीबी की समस्या से पीड़ित हैं,उनके संपर्क में आने से भी यह समस्या हो सकती है।



















