= मामला सरपतहां थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत उसरौली का
मनोज सिंह, संवाददाता सुरापुर, नजरिया न्यूज, 02मई।
आए दिन लेखपालों को जांच आख्या देनी पड़ती है। सही रिपोर्ट के अभाव में पीड़ित पक्षों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। वहीं लेखपाल के दोनों हाथ में लड्डू होता है। लेखपाल पीड़ितों को कानूनी सलाह देकर दबंगई करने वालों की दबंगई पर एक तरह से मनचाही मोहर लगा देता है।
सरपतहां थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत उसरौली में दो सगे भाइयों के वंशजों में से एक ने दूसरे के मकान से सटकर गड्ढा खोद दिया। इस गड्ढे में बारिश का पानी जमा होने पर पीड़ित के मकान को नुक्सान पहुंच सकता है। लेखपाल ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस तथ्य का वर्णन ही नहीं किया। कानूनी सलाह भरी रिपोर्ट एसडीएम शाहगंज को सौंप दिया है।
ऐसी रिपोर्ट पर एसडीएम शाहगंज से पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद पर पानी फिर गया है। वहीं दूसरा पक्ष खुश है कि उसने जो गड्ढा खोदा है, वह यथावत है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ऐसे मामलों में स्पष्ट आदेश है कि पीड़ित पक्षों को प्रशासनिक कार्रवाई से पदाधिकारी संतुष्ट करें। दबंग जिस भाषा को समझता हो, उसे उसी भाषा में उसको समझाया जाए।
शाहगंज तहसील के उसरौली निवासी सह पीड़ित अनिल उपाध्याय ने मीडिया को बताया कि उनके मकान से सटकर गड्ढा खोद दिया गया। इसकी जानकारी सरपतहा थाना की 100नंबर की पुलिस को तुरंत दी गई।
जौनपुर, उत्तर प्रदेश- दंबगई की रिपोर्ट लेखपाल नहीं दे तो पीड़ित और एसडीएम को क्या करना चाहिए? रिपोर्ताज
= मामला सरपतहां थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत उसरौली का
मनोज सिंह, संवाददाता सुरापुर, नजरिया न्यूज, 02मई।
पीड़ित ने बताया कि ” भूमाफिया ने गड्डा को पाटने से पुलिस के समक्ष इन्कार कर दिया”। इसकी जानकारी मैंने जिलाधिकारी जौनपुर को आवेदन के माध्यम से दिया।
पीड़ित अनिल उपाध्याय ने डीएम जौनपुर की कार्रवाई की प्रति मीडिया को दिखाते हुए बताया कि “डीएम जौनपुर ने एसडीएम शाहगंज को नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।”
पीड़ित अनिल उपाध्याय ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि डीएम जौनपुर के निदेश पर एसडीएम शाहगंज के द्वारा क्षेत्रीय लेखपाल से गड्ढे के बाबत रिपोर्ट तलब की गई।
पीड़ित अनिल उपाध्याय ने एसडीएम शाहगंज को लेखपाल द्वारा सौंपी गई एकतरफा रिपोर्ट की प्रति मीडिया को दिखाते हुए बताया गया कि ” लेखपाल ने अपनी जांच आख्या में दबंग द्वारा वादी के मकान से सटकर गड्ढा खोदने की रिपोर्ट एसडीएम शाहगंज को नहीं दिया है”।
लेखपाल ने जांच आख्या में लिखा है ” मामला आबादी विवाद का है। न्यायालय से आषुतोष प्राप्त करें”।
उल्लेखनीय है कि न्यायालय से आसुतोष प्राप्त करने में बहुत अधिक समय लगेगा और तबतक पीड़ित का मकान ढहा सकता है। दबंग पक्ष यही चाहता और लेखपाल ने वैसी ही सलाह पीड़ित को दिया है।
सवाल उठता है कि यदि मकान ढह गया तो इसके लिए ज़िम्मेवार कौन होगा? क्या लेखपाल को मकान ढह जाने का जिम्मेवार ठहराया जाएगा।
दूसरा सवाल, क्या नया गड्ढा पाटवाने और न्यायालय जाने की रिपोर्ट लेखपाल द्वारा एसडीएम शाहगंज को नहीं दी सकती थी। तीसरा सवाल, क्या किसी के मकान की नींव से सटकर खोदा जा सकता है?
चौथा सवाल, “यदि लेखपाल उसरौली की जांच आख्या ही न्याय है तो उससे दबंग क्या बिगाड़ा ?
फिलहाल लेखपाल की ऐसी एकतरफा रिपोर्ट से लाठी तंत्र को बढ़ावा मिला है। लेखपाल की जांच आख्या रिपोर्ट एसडीएम शाहगंज के पास है। पीड़ित पक्ष लेखपाल की रिपोर्ट को कोस रहा है।
दूसरे पक्ष के विषय में सूत्रों ने बताया कि वह बहुत पहले हुई पंचायत को मानने को तैयार नहीं है। पीड़ित पक्ष के मकान से सटी भूमि पर पीलर ढालने के लिए गड्ढा खोदा है।























