मेरठ: यूपी में किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. पहली बार प्रदेश के सभी 75 जिलों में राष्ट्रीय एकीकृत बागवानी मिशन योजना लागू कर दी है. यह लाभ किसानों को सोमवार से ही मिलने लगेगा.
इसके तहत उद्यान विभाग से ताल्लुक रखने वाली परियोजनाओं के लिए छोटे स्तर पर काम करने पर भी अनुदान मिलेगा. इसके साथ ही अनुदान राशि भी बढ़ा दी गई है. इसका लाभ छोटे किसानों को मिल सकेगा
बता दें कि यह योजना पहले सिर्फ 45 जिलों में ही लागू थी. अब अलीगढ़, बागपत, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, शामली, अमरोहा समेत 30 जिले भी इसमें शामिल हो गए हैं. इस बारे में उद्यान विभाग के मेरठ मंडल के उप निदेशक विनीत कुमार बताते हैं कि किसानों की आय को बढ़ाने के लिए स्कीम चलाई जा रही है.
2025-26 को लेकर बड़ा परिवर्तन लागू हो गया है. पहले प्रदेश के 45 जिलों में भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित एकीकृत बागवानी मिशन योजना लागू थी. बाकी जिलों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना लागू थी. अब 2025 में प्रदेश के सभी 75 जिलों में एकीकृत बागवानी योजना लागू की गई है.
एकीकृत बागवानी मिशन योजना को लेकर जो गाइडलाइन थी, वह 2014-2015 की लागतों के आधार पर लागू थी. समय-समय पर कृषकों के द्वारा भी इसे बढ़ाने की मांग की जा रही थी.
क्या है नई गाइडलाइन: वित्तीय वर्ष 2025-26 की सब्सिडी को लेकर जो गाइडलाइन है, उसके मुताबिक अब सब्सिडी को बढ़ाया गया है. इसमें समय की मांग को देखते हुए और भी कई सारी फसलों को शामिल किया गया है, जो पूर्व में नहीं थीं.
विनीत कुमार बताते हैं कि जिस प्रकार बाजार की मांग है, उसको देखते हुए इसमें बदलाव किए गए हैं. इस स्कीम के तहत बहुत सी ऐसी फसलें हैं, जो किसान उगाना चाहते हैं तो इसमें अनुदान लेकर अपना काम कर सकते हैं.
बताते हैं कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत एनसीआर क्षेत्र में हाइड्रोपोनिक विधि से फसल उगाने के लिए डिमांड आ रही थी. मांग थी कि इस तरफ भी सरकार ध्यान दे और अनुदान मिल सके. जो नई कार्ययोजना अब आई है, इसमें नई तकनीक को शामिल कर लिया गया है.
इसके साथ साथ फेंसिंग (तार बंदी) को भी शामिल किया गया है. यानी कोई किसान अपनी बागवानी सुरक्षित करने के लिए अनुदान पा सकता है. विशेष रूप से इसमें यह प्रावधान है कि प्रति किसान अधिकतम 1000 मीटर रनिंग मीटर तक फेंसिंग करा सकता है.
अनुदान राशि भी बढ़ी: मशरूम उत्पादन के लिए पहले जहां एक यूनिट की अधिकतम लागत 20 लाख रुपये तक थी, अब उसको बढ़ाकर 30 लाख किया गया है और इसमें किसान को 40 फीसदी तक अनुदान है. खास बात यह है कि यह बड़ी यूनिट के लिए योजना थी, लेकिन अब अगर कोई छोटी यूनिट लगाकर काम करना चाहता है तो उसके लिए भी व्यवस्था है.
अगर कोई 200 (20×10 वर्ग फीट) वर्ग फीट एरिया में भी मशरूम इकाई लगाना चाहता है और उसकी दो लाख रुपये यूनिट की लागत है तो एक लाख का उसे अनुदान मिलेगा. पहली बार ऐसा निर्णय लिया गया है. पहले छोटे स्केल पर काम करने वालों के लिए यह योजना नहीं थी. पॉली हाउस या ग्रीन हाउस की लागत लगभग 40 लाख या उससे ज्यादा आती थी. अब किसान अपने सोर्स से अगर छोटे लेवल पर काम करना चाहता है तो भी उद्यान विभाग सहयोग करेगा.
किसान कैसे उठाएं योजना का लाभ: किसानों को अगर कहीं भी कोई भी समस्या हो या वह स्कीम को लेकर जानाकारी चाहते हैं तो जिला उद्यान विभाग में सम्पर्क कर सकते हैं. योजना में आवेदन कर सकते हैं.
ऑनलाइन आवेदन के लिए शीघ्र ही पोर्टल खुलेगा. अलग-अलग जनपदों के लिए इसमें जल्द ही लक्ष्य शासन स्तर से मिलने जा रहा है. उसके बाद उसी लक्ष्य के अनुरूप जो भी आवेदक रुचि लेंगे, उन्हें योजना का लाभ मिलेगा.
विनीत कुमार का कहना है कि जितने भी किसान इन योजनाओं के लिए आवेदन करेंगे, कोशिश रहेगी कि उन सभी को सम्मिलित करते हुए उनको योजना का लाभ दिलाया जाए, अगर लक्ष्य से अधिक किसान आवेदन करते हैं तो ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बजट की मांग की जाएगी.
किन फल-सब्जियों के लिए मिलेगा अनुदान: किसान मशरूम के अलावा सभी तरह की फल-सब्जियों के लिए योजना का लाभ ले सकते हैं. इसमें आलू, अदरक, लिची, स्ट्राबेरी, शहद, शिमला मिर्च, टमाटर के साथ ही आयुर्वेदिक औषधियों की पैदावार किसान योजना के तहत कर सकते हैं. इसमें अनुदान देने के साथ ही अन्य सहयोग भी दिया जाएगा.























