अनिल उपाध्याय, नजरिया न्यूज ब्यूरो पूर्वांचल, 26फरवरी।
पत्रकार हम क्यों है, आजमगढ़ में यह सवाल छोड़कर गए हैं नये पत्रकारों के लिए बीबीसी के वरिष्ठतम संवाददाता रेहान फजल साहब। वे 25फरवरी को
लोकतंत्र,मीडिया एवं सरोकार के स्वरूप पर जन चेतना की चिंता और चिंतन के दो दिवसीय संवादी उत्सव में अपनी बात रख रहे थे।
श्री फजल साहब ने रिपोर्टिंग की निष्पक्ष विधा कि कई घटनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या की खबर के कबरेज की कहानी सुनाते हुए उन्होंने कहा कि बिना आधिकारिक पुष्टि के बड़ी से बड़ी खबर भी बीबीसी ब्रेक नहीं करती। प्रधानमंत्री तक को इंटरव्यू में पहले से सवाल भेजने की बीबीसी में सख्त मनाही है। उन्होंने चिंता जताई कि पत्रकारों की स्वतंत्रता की सूची में भारत आज 161वें नंबर पर है। उन्होंने हाल ही अमेरिका के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खबर के कबरेज कि उदाहरण देते हुए कहा कि सोशल मीडिया और मेन मीडिया, दोनों ही निष्पक्षता के धर्म का अनुपालन ईमानदारी से नहीं कर रहीं हैं।
निष्पक्ष कबरेज का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री गांधी को मौत की घटनाएं सुनाई। उन्होंने कहा कि बीबीसी कार्यालय में हेड आफिस से सूचना आई -क्या प्रधानमंत्री कार्यालय में कुछ हुआ है? प्रधानमंत्री कार्यालय जाने पर पता चला कि एंबुलेंस आया था।एम्स के डाक्टर खून से लथपथ ग्लब्स पहने बाहर निकले!
बीबीसी ने संवाददाता ने कहा, सब ठीक है ? उन्होंने कहा: 35गोलियां लगीं हैं! कैसे सब ठीक रहेगा।
आजमगढ़ -बीबीसी के वरिष्ठ संवाददाता रेहान फजल ने कहा – सोशल मीडिया और मेन मीडिया, दोनों ही निष्पक्षता के धर्म का अनुपालन ईमानदारी से नहीं कर रहे हैं..
उसके बाद बीबीसी संवाददाता ने आरके धवन से हालचाल लिया, सब ठीक है ना! उन्होंने कहा अंग रक्षक ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई है।
इस खबर को बीबीसी हेड आफिस ने तबतक नहीं ब्रेक कि जब-जब कि समाचार एजेंसियों ने भी पुष्टि नहीं कर दी। इस प्रकार के और उदाहरण रेहान फ़ज़ल साहब ने शेयर किया।
शेष कबरेज वीडियो में…।
उल्लेखनीय है कि रविवार को अन्य वक्ताओं ने भी मीडिया और साहित्य के विविध विषयों पर गंभीर चिंतन किया।
हरिऔध कला केंद्र के संवादी उत्सव में आजतक समाचार चैनल के पूर्व संपादक राजेश बादल ने कहा कि परिवर्तन के लिए बहुत से लोगों की आवश्यकता नहीं होती बल्कि कुछ ही लोग अपनी सकारात्मक ऊर्जा से परिवर्तन कर सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर कहा कि आम आदमी सोशल मीडिया में अपने व्यक्तिगत चीजों को शेयर कर रहा है और उससे विचार गायब होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सबसे सुंदर संविधान है लेकिन उसकी रक्षा करने वाले अगर सही नहीं होंगे तो उसे लोग का कोई फायदा नहीं होगा।























