- उत्तर प्रदेश में चकबंदी विभाग के एसीओ को दी गई है जमींदारों से अधिक शक्ति, निरंकुश होकर करते हैं मनमानी
*दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, सुल्तानपुर 12फरवरी।*
अधिवक्ता जयकृष्ण पांडेय ने कहा कि जिस गांव में कृषि भूमि की चकबंदी होती है। या चकबंदी हो रही है। उस गांव में चोरी बंद जाती है। उन्होंने बताया कि यह संस्कार चोरों को कांग्रेस पार्टी ने दी ।अब तो कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्रियों द्वारा चौरों को दिए गए संस्कार परंपरा बन चुकी है।
चकबंदी वाले गांवों में चोरी क्यों नहीं होती, उन्होंने समझाते हुए बताया कि उनके पिता जी भी अधिवक्ता थे। चकबंदी वाले गांव के काश्तकार उनसे अपना अनुभव साझा किया करते थे। दरअसल, चकबंदी के दौरान भिन्न-भिन्न काश्तकारों की भूमि सर्वे के दौरान काट दिए जाते थे।
यह अधिकार अंग्रेजी हुकूमत के दौरान जमीदारों को था। कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्रियों ने यह अधिकार चकबंदी विभाग के कानून गो को दे दिया।
इस अधिकार का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।
अधिवक्ता कृष्ण कुमार पांडेय ने बताया कि चकबंदी सर्वे के दौरान कानून गो को जमींदार से आधिक शक्ति दी गई है लेकिन कानून गो के निर्णय को चकबंदी एसीओ न्यायालय में चुनौती दी जा सकती थी।
उन्होंने कहा: चुनौती का मन बनाते ही मुकदमेबाजी शुरू होती है। काश्तकारों की हालत मुकदमा लड़ते -लड़ते भिखारी से भी बदतर हो जाती है। भिखारी के घर में चोरी नहीं होती है। इसलिए चोर, चकबंदी वाले गांवों में चोरी करने नहीं आते।
उन्होंने कहा कि यह दस्तूर भाजपा के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जारी है। चकबंदी एसीओ को चकबंदी सर्वे के बहुत अधिक शक्ति दी गई है लेकिन दंड का प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसी ही शक्ति अंग्रेजी हुकूमत के समय जमींदारों को थी। जमींदार किसी को भी जमीन दे सकते थे और छीन सकते थे।
*काश्तकारों ने सुनाई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की कहानी :*
1970 का दशक था। सुलतानपुर जिले के कादीपुर तहसील के ग्राम पंचायत पाकरपुर चकबंदी शुरू हुई। कानून गोऔर एसीओ ने मनमानी चक काट दिया। क्षुब्ध किसान एसीओ और कानून गो के निर्णयों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। ग्राम पंचायत पाकरपुर की चकबंदी हाईकोर्ट ने रद कर दी।
*लगभग 40वर्ष के बाद ग्राम पंचायत पाकरपुर की कहानी*
इस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। एसीओ चकबंदी को दंडित करने का प्रावधान नहीं बनाया गया है। इसलिए काश्तकारों को परेशान करने का अधिकार एसीओ के पास बरकरार है।
*एसीओ चकबंदी को कानून गो ने दी हास्यास्पद रिपोर्ट और एसीओ चकबंदी ने लिया हास्यास्पद निर्णय;*
ग्राम पंचायत पाकरपुर में गाटा संख्या 2001और 1934 का क्षेत्रफल दो बीघा है। कानून गो की रिपोर्ट के मुताबिक गाटा संख्या 2001और 1934 में काश्तकार ए का हिस्सा बीघा और बीका हिस्सा भी एक बीघा है।
कानून ने अपनी रिपोर्ट में सर्वे के दौरान लिखा ” बी के तीन हिस्सेदार है-सी, ई, डी”। इस प्रकार बी का हिस्सा कुल क्षेत्रफल में 1/2अर्थीत आधा होगा। कानून गो इसी रिपोर्ट को एसीओ चकबंदी ने भी मान लिया।
गौरतलब है कि कानून गो और एसीओ के हास्यास्पद रिपोर्ट की जानकारी ए नामक काश्तकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीएम किशनगंज को दी लेकिन आज तक ए नामक काश्तकार को न्याय नहीं मिला है। मामला सीओ के न्यायालय में विचाराधीन है।
उक्त मामले में उल्लेखनीय है कि कानून गो लिख रहा है कि बी के अंश में तीन हिस्सेदार हैं। फिर आगे लिख रहा है कि “बी” का हिस्सा कुल क्षेत्रफल में आधा होगा।
यह सवाल है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीएम सुलतानपुर से है कि “बी” की जमीन में जब तीन हिस्सेदार हैं तो “बी “का कुल क्षेत्रफल में हिस्सा 1/2अर्थात आधा क्यों लिखा गया। स्वाभाविक है काश्तकार “ए ” को परेशान करने तथा”बी ” से घूस में बड़ी राशि चकबंदी विभाग के कानून गो और एसीओ ने लिया होगा।
क्रमशः जारी…























