दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज 20दिसंबर।
देश के पहले चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ जनरल बिपिन रावत की 8 दिसंबर, 2021 को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत से पूरा भारत स्तब्ध रह गया था। मौत के कारणों की रिपोर्ट में समिति ने 13वीं रक्षा योजना अवधि के दौरान हुई भारतीय वायुसेना के विमान दुर्घटनाओं की संख्या के आंकड़ों को साझा किया है।
हेलीकॉप्टर क्रैश में उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत 12 अन्य लोगों की मौत हुई थी।
विदित है कि उनकी मौत के तीन साल बाद, मंगलवार के दिन लोकसभा में रक्षा मामलों की स्थायी समिति की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि एमआई-17 दुर्घटना “मानवीय चूक” से हुई थी।
इस रिपोर्ट में समिति ने 13वीं रक्षा योजना अवधि के दौरान हुई भारतीय वायुसेना के विमान दुर्घटनाओं की संख्या के आंकड़ों को साझा किया है।
जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 12 सेना के जवानों को लेकर एमआई-17 हेलीकॉप्टर तमिलनाडु के कोयंबटूर के सुलूर आर्मी बेस से निकला था। यह हेलीकॉप्टर वेलिंगटन स्थित डिफेंस स्टाफ सर्विसेज़ कॉलेज की तरफ बढ़ रहा था।
लैंडिंग से कुछ मिनट पहले ही, हेलीकॉप्टर तमिलनाडु के नीलगिरी ज़िले के कुन्नूर के पास पहाड़ी इलाक़े में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसमें जनरल बिपिन रावत,उनकी पत्नी समेत 11 जवानों की मौत हो गई।
शौर्य चक्र विजेता ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह इस हादसे में ज़िंदा बचे अकेले इंसान थे।लेकिन एक हफ़्ते के बाद इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई थी।
इस दुर्घटना में जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका राजे सिंह रावत,उनके डिफ़ेंस असिस्टेंट ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर,लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, एमआई-17 के पायलट विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान और पायलट स्क्वॉड्रन लीडर कुलदीप सिंह की जान गई थी।
लोकसभा -मानवीय चूक से हुई थी दुर्घटना -देश के पहले चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ जनरल बिपिन रावत सहित 12 अन्य की 8 दिसंबर, 2021 को हो गई थी मौत
साथ ही, जूनियर वारंट ऑफिसर राणा प्रताप दास, जूनियर वारंट ऑफिसर अरक्कल प्रदीप, हवलदार सतपाल राय, नायक गुरसेवक सिंह, नायक जितेंद्र कुमार, लांस नायक विवेक कुमार और लांस नायक बी साई तेजा की भी मौत हो गई थी।
जनरल बिपिन रावत को 31 दिसंबर 2019 को भारत का पहला सीडीएस नियुक्त किया गया था और उन्होंने 1 जनवरी 2020 को अपना कार्यभार संभाला था।
बतौर सीडीएस जनरल रावत ने भारतीय सेना के विभन्न अंगों में तालमेल और सैन्य आधुनिकीकरण जैसी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियों को अंजाम दिया।जनरल रावत इससे पहले भारतीय सेना के प्रमुख रह चुके थे। वे 31 दिसंबर 2016 से 1 जनवरी 2017 तक भारत के 26वें थल सेना प्रमुख भी रहे।
वे सख़्त और सटीक फ़ैसले लेने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने पूर्वोत्तर में भारत को उग्रवाद से मुक्ति दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।साथ ही पाकिस्तान में चरमपंथियों के ठिकानों को ध्वस्त करने में भी उनकी अग्रणी भूमिका थी।






















