दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 15 दिसंबर।
संविधान के 75 वर्ष की यात्रा यादगार यात्रा है और विश्व के सबसे महान और विशाल लोकतंत्र की यात्रा है।
इसकी मूल में हमारे संविधान निर्माताओं की दीर्घ दृष्टि, हमारे संविधान निर्माताओं के योगदान और जिसको लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, ये 75 वर्ष पूर्ण होने पर एक उत्सव मनाने का पल है।
75 वर्ष की ये उपलब्धि असाधारण है। जब देश आजाद हुआ और उस समय भारत के लिए जो-जो संभावनाएं व्यक्त की गई थी उन संभावनाओं को निरस्त करते हुए, परास्त करते हुए भारत का संविधान हमें यहां तक ले आया है।
इसलिए इस महान उपलब्धि के लिए, संविधान निर्माताओं के साथ-साथ देश के कोटि-कोटि नागरिकों का आदरपूर्वक नमन करता हूं।
आज हमारी हर योजना की सेंटर में महिलाएं होती हैं और जब हम ये संविधान के 75 वर्ष मना रहे हैं, तो ये अच्छा संयोग है कि भारत के राष्ट्रपति के पद पर एक आदिवासी महिला विराजमान है। यही नहीं, हमारे सदन में भी महिला सांसदों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
अब हमारा देश बहुत तेज गति से विकास कर रहा है। भारत बहुत ही जल्द विश्व की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में बहुत मजबूत कदम रख रहा है।
इतना ही नहीं, ये 140 करोड़ देशवासियों का संकल्प है कि जब हम आजादी की शताब्दी मनाएंगे तो हम इस देश को विकसित भारत बना कर रहेंगे।
विविधता में एकता ये भारत की विशेषता रही है और इस देश की प्रगति भी विविधता को सेलिब्रेट करने में है।
लेकिन गुलामी की मानसिकता में पले-बढ़े लोगों ने, भारत का भला न देख पाने वाले लोगों ने… वो विविधता में विरोधाभास ढूढंते रहे।
इतना ही नहीं, विविधता जो हमारा अमूल्य खजाना है उसको सेलिब्रेट करने के बजाय उस विविधता में ऐसे जहरीले बीज बोने के प्रयास करते रहे, ताकि देश की एकता पर चोट पहुंचे।
अगर हमारी नीतियों को देखेंगे तो पिछले 10 साल… देश की जनता ने जो मुझे सेवा करने का मौका दिया है, उन नीतियों और निर्णयों को देखेंगे तो भारत की एकता को मजबूती देने का निरंतर हम प्रयास करते रहे हैं।
आर्टिकल 370 देश की एकता में दीवार बना पड़ा था, लेकिन देश की एकता हमारी प्राथमिकता थी, जो हमारी संविधान की भावना थी… इसीलिए आर्टिकल 370 को हमने जमीन में गाड़ दिया।
कांग्रेस के माथे पर ये जो पाप है, ये कभी भी धुलने वाला नहीं है!
कांग्रेस के एक परिवार ने संविधान को चोट पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। मैं इसलिए भी इस परिवार की चर्चा करता हूं कि मेरे 75 साल की इस यात्रा में 55 साल, एक ही परिवार ने राज किया है, इसलिए क्या-क्या हुआ है, देश को ये जानने का अधिकार है।
पहले पंडित नेहरू का अपना संविधान चलता था और इसलिए उन्होंने वरिष्ठ महानुभावों की सलाह मानी नहीं।
करीब 6 दशक में 75 बार संविधान बदला गया, जो बीज देश के पहले प्रधानमंत्री जी ने बोया था उस बीज को खाद-पानी देने का काम एक और प्रधानमंत्री ने किया, उनका नाम था श्रीमती इंदिरा गांधी।
1971 में सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आया था, उस फैसले को संविधान बदलकर पलट दिया गया और 1971 में ये संविधान संशोधन किया गया था। उन्होंने हमारे देश की अदालत के पंख काट दिए थे।
कांग्रेस ने निरंतर संविधान की अवमानना की। संविधान के महत्व को कम किया। कांग्रेस का इतिहास इसके अनेक उदाहरणों से भरा पड़ा है।
आर्टिकल 370 के बारे में तो सबको पता है, लेकिन 35-ए के बारे में पता बहुत कम है।
भारत के संविधान का अगर कोई पहला पुत्र है तो ये संसद है, लेकिन उसका भी इन्होंने गला घोंटने का काम किया।
नजरिया न्यूज, पटना -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी -एक पीएम कहते थे दिल्ली से एक रुपया निकलता था 15 पैसा पहुंचता है, आज दिल्ली से 1 रुपये निकलता है वो गरीब के पास पूरा का पूरा पहुंचता है।जिनको कोई नहीं पूछता उनको मोदी पूजता है…
नेहरू जी से लेकर राजीव गांधी तक, कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने आरक्षण का घोर विरोध किया है। इतिहास कह रहा है आरक्षण के विरोध में लंबी-लंबी चिट्ठियां स्वयं नेहरू जी ने लिखी है, मुख्यमंत्रियों को लिखी है। इतना ही नहीं, सदन में आरक्षण के खिलाफ लंबे-लंबे भाषण इन लोगों ने किए हैं।
बाबा साहेब अंबेडकर समता के लिए और भारत में संतुलित विकास के लिए आरक्षण को लेकर आए… लेकिन उन्होंने (कांग्रेस) इनके खिलाफ झंडा ऊंचा किया हुआ था। दशकों तक मंडल कमीशन की रिपोर्ट को डिब्बे में डाल दिया था।
जब कांग्रेस को देश ने हटाया, जब कांग्रेस गई… तब जाकर ओबीसी को आरक्षण मिला… ये कांग्रेस का पाप है।
कांग्रेस ने सत्ता सुख के लिए, सत्ता भूख के लिए… अपनी वोट बैंक को खुश करने के लिए, धर्म के आधार पर आरक्षण का नया खेल खेला है, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।
कांग्रेस के लिए सत्ता सुख और सत्ता भूख… यही एकमात्र इतिहास है, कांग्रेस का वर्तमान है।
हमने भी संविधान संशोधन किए हैं… लेकिन देश की एकता के लिए, देश की अखंडता के लिए, देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए और संविधान की भावना के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ किए हैं।
एक शब्द है- जुमला, जिसके बिना वो (कांग्रेस) जी नहीं सकते। लेकिन इस देश को पता है हिंदुस्तान में अगर सबसे बड़ा जुमला कोई था और वो 4-4 पीढ़ी ने चलाया। वह जुमला था – ‘गरीबी हटाओ’।
यह ऐसा जुमला था जिससे उनकी राजनीति की रोटी तो सेकी जाती थी, लेकिन गरीब का हाल ठीक नहीं होता था।
ये सब सिर्फ शब्दों में नहीं हैं… जब-जब हमे कसौटी पर कसा गया, तब-तब पाया गया कि हम तप करके निकले हुए लोग हैं…
2014 में जब एनडीए को सरकार बनाने का मौका मिला तो लोकतंत्र और संविधान को मजबूती मिली।
गरीबों को मुश्किलों से मुक्ति मिले, यह हमारा बहुत बड़ा मिशन और संकल्प है। हमें गर्व है कि आज 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘समान नागरिक संहिता, यह विषय संविधान सभा के ध्यान के बाहर नहीं था। संविधान सभा ने UCC को लेकर लंबी चर्चा की और उन्होंने बहस के बाद निर्णय किया कि अच्छा होगा कि जो भी सरकार चुनकर आए वह उसका निर्णय करे और देश में UCC लागू करे।
सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार कहा है कि देश में UCC लाना चाहिए… संविधान और संविधान निर्माताओं की भावना को ध्यान में रखते हुए, हम सेक्युलर सिविल कोड के लिए पूरी ताकत से काम कर रहे हैं।
कांग्रेस के एक अध्यक्ष हुआ करते थे जो अति पिछड़े समाज से आते थे, सीताराम केसरी जी। कहा जाता है उन्हें बाथरूम में बंद किया गया, उठाकर सड़क पर फेंक दिया गया। अपनी पार्टी के संविधान को ना मानना। एक परिवार ने पूरी पार्टी पर कब्जा कर लिया।
1996 में सबसे बड़े दल के रूप में बीजेपी जीत कर आई। राष्ट्रपति ने सबसे बड़े दल को प्रधानमंत्री की शपथ के लिए बुलाया। 13 दिन सरकार चली। अगर हमारी भावना संविधान के प्रति नहीं होती, तो हम भी सत्ता सुख भोग सकते थे।
1998 में हमारी सरकार थी। लेकिन ‘हम नहीं तो कोई नहीं वाली भावना’ रखने वाले परिवार ने उसे चलने नहीं दिया। खरीद फरोख्त तब भी हो सकती थी, लेकिन हमने 1 वोट से सरकार गिराना कबूल किया, ये हमारा इतिहास है हमारा संस्कार है।
देश ने देखा ‘कैश फॉर वोट का काम इन लोगों ने किया, संसद में नोटों के ढेर दिखाए। भारत के संविधान की भावना के लिए इससे बुरा क्या होगा।
90 के दशक में कई सांसदों को रिश्वत देने का पाप किया गया।
कांग्रेस के लिए सत्ता सुख सत्ता की भूख यही एक मात्र इतिहास है यही वर्तमान है।
2014 के बाद हमने भी संविधान संशोधन किए लेकिन देश की एकता और अखंडता के लिए।
हमने ओबीसी के सम्मान के लिए संविधान संशोधन किया हमें गर्व है ये करने का।
हमनें संविधान संशोधन किया जब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10% आरक्षण देने का काम किया। सबने इसके लिए सहयोग किया था।
हमने संशोधन किया महिलाओं को संसद में सम्मान देने का। हमने नारी वंदन अधिनियम लागू किया।
हमने कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के लिए संविधान संशोधन किया।
हमने सीएए लाने के लिए संविधान संशोधन किया है, हमें इस पर गर्व है।
हमने पुरानी गलतियों को ठीक करने और बेहतर भविष्य के लिए संविधान संशोधन किए हैं।
आपने गरीबों और गरीबों को केवल टीवी और अखबार में देखा वरना कभी ऐसा जुल्म नहीं करते। देश के गरीबों के पास टॉयलेट नहीं था, हमारी सरकार ने गरीबों के घर शौचालय बनाने का काम किया।
देश के 80 फीसदी लोगों के पास पीने का पानी नहीं था। ये काम हमने बड़े समर्पण भाव से आगे बढ़ाया है।
देश की करोड़ो माताएं धुएं में खाना बनाती थीं, उनका स्वास्थ्य खराब होता था। हमने महिलाओं को धुएं से मुक्ति देने का काम किया।
2013 तक चर्चा थी कि कितने सिलेंडर देंगे, हमने घर-घर गैस सिलेंडर पहुंचा दिया है।
हमारी सरकार ने गरीबों को मुफ्त इलाज देने के लिए आयुष्मान योजना लागू करने का काम किया।
6 जरूरतमंदो को राशन देने का काम हमने किया, ये लोग इसका मजाक बनाते हैं।
देश में गरीबों के नाम पर बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया लेकिन 2014 तक देश के 50 करोड़ नागरिक ऐसे थे, जिन्होंने बैंक का दरवाजा नहीं देखा था।
लेकिन आज 50 करोड़ों गरीबों के बैंक खाते खोलकर बैंक के दरवाजे गरीबों के लिए खोल दिए।
एक पीएम कहते थे दिल्ली से एक रूपया निकलता था 15 पैसा पहुंचता है, आज दिल्ली से 1 रुपये निकलता है वो गरीब के पास पूरा का पूरा पहुंचता है।
जिनको कोई नहीं पूछता उनको मोदी पूजता है।
दिव्यांगजन हर दिन संघर्ष करता है, अब हमने दिव्यांगजनों के लिए एक कॉमन साइन लैंग्वेज बनाने का काम किया।
आदिवासियों के लिए मंत्रालय अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने बनाया। इनके मन में कभी इसे करने का ख्याल नहीं आया।
हमारी सरकार ने मछुआरा समाज के लिए अलग से मंत्रालय बनाया अलग से बजट दिया।
हमारे देश के छोटे किसान को सामर्थ्य देने के लिए सहकारी क्षेत्र को बल देने के लिए हमारी सरकार ने अलग सहकारिता मंत्रालय बनाया।
हमने युवाओं को स्किल देने के लिए अलग स्किल मंत्रालय बनाया।
हमारी सरकार ने समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए काम किया है।
हमने ट्रांसजेंडर के अधिकारों को दिलाने का काम किया है, जिन्हें समाज में कोई नहीं पूछता था।
1 लाख ऐसे नौजवानों को राजनीति में लाना है, जिसके परिवार से कोई राजनीति में नहीं है। आज मैं इस सदन के पवित्र मंच से 11 संकल्प सदन के सामने रखना चाहता हूं..
चाहे नागरिक हो या सरकार हो… सभी अपने कर्तव्यों का पालन करें।
हर क्षेत्र, हर समाज को विकास का लाभ मिले, सबका साथ-सबका विकास हो।
भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस हो, भ्रष्टाचारी की सामाजिक स्वीकार्यता न हो।
देश के कानून, देश के नियम… देश की परंपराओं के पालन में देश के नागरिकों को गर्व होना चाहिए, गर्व का भाव हो।
गुलामी की मानसिकता से मुक्ति हो, देश की विरासत पर गर्व हो।
देश की राजनीति को परिवारवाद से मुक्ति मिले।
संविधान का सम्मान हो, राजनीति स्वार्थ के लिए संविधान को हथियार न बनाया जाए।
संविधान की भावना के प्रति समर्पण रखते हुए जिनको आरक्षण मिल रहा है उसको न छीना जाए और धर्म के आधार पर आरक्षण की हर कोशिश पर रोक लगे।
women led development में भारत दुनिया के लिए मिसाल बने।
राज्य के विकास से राष्ट्र का विकास… ये हमारा विकास का मंत्र हो।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत का ध्येय सर्वोपरि हो।























