- महाराष्ट्र- उत्तल प्रदेश में इंडिया गठबंधन को वोट देने क्या सोच रहे हैं?
अरुण सिंह, संवाददाता नजरिया न्यूज, लखनऊ 30नवंबर।
अखिल भारतीय कांग्रेस मुख्यालय में शुक्रवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के कारणों को जानने की पहल की। इस पहल की उत्तर प्रदेश में चर्चा है। उत्तर प्रदेश के कुछ कांग्रेसियों ने कह:
आज के अखबार सही सूचना नहीं बताते। अक्सर परोसे जाने वाले झूठ क्यों झेला जाए। अखबार में कल संसद की कार्यवाही न हो पाने पर प्रधानमंत्री ने जो कहा वह लीड या सेकेंड लीड है। द हिन्दू और द टेलीग्राफ में यह सेकेंड लीड है। इनमें द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, शिन्दे के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी मांगते हुए सेना ने बिहार मॉडल का उल्लेख किया। द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक है, भाजपा दृढ़ निश्चय फडनविस ही होंगे (मुख्यमंत्री)।
पिछली बार भाजपा ने शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था पर शिवसेना ने उसके साथ मिलकर सरकार बनाने से इनकार कर दिया। इस कारण जो सब हुआ वह फिर से बताने की जरूरत नहीं है। एक मुख्यमंत्री को ज्यादा विधायक होने के बावजूद उपमुख्यमंत्री बनाया गया और दल बदलकर समर्थन देने वाले को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसमें पैसों का लेन-देन हुआ या विधायक खरीदे गये , अथवा नहीं या अपनी ही पार्टी को मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए तोड़ा या ईडी के डर या भाजपा अथवा संघ से प्रेम में यह सब अभी मुद्दा नहीं है।
महाराष्ट्र का चुनाव परिणाम अविश्वसनीय; राजनीतिक विश्लेषक योगेन्द्र यादव …
मुद्दा यह भी नहीं है कि इसमें संवैधानिक व्यवस्थाओं का क्या हुआ। सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या आया। चुनाव फिर से हुए और अब पुरानी बातों का मतलब नहीं है हालांकि, प्रधानमंत्री के लिए अभी भी न सिर्फ 1947 और 1975 की इमरजेंसी प्रासंगिक है बल्कि वे नेहरू और गांधी की बात भी ऐसे करते हैं जैसे अभी वे भी उनके प्रतिद्वंद्वी हों। हालांकि, यह सब अभी मुद्दा नहीं है।
हिंदी बेल्ट के एक बड़े अखबार को पढ़ने वाले कांग्रेसियों ने कहा: हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस की हार की चर्चा दिल्ली में कांग्रेसियों की बैठक के हवाले से अखबार में है।
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हवाले जो कहा गया उसमें हार का कारण कांग्रेस की कलह बताई गई है। जबकि कांग्रेसी यह जानते हैं कि हार का कारण ईवीएम में सेटिंग है।
फिलहाल हिंदी बेल्ट का बड़ा अखबार एएनआई के हवाले सै लिखता है, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ने चुनाव परिणामों से सबक लेकर कठोर निर्णय कलह पर लेने की बात कही है। पदाधिकारी की जवाबदेही तय करनी होगी और खामियों को दूर करना होगा। कांग्रेस की बैठक में कहा गया कि तीन राज्यों के परिणाम उम्मीद के मुताबिक क्यों नहीं रहे।
कांग्रेस नेताओं ने पार्टी की कलह पर मंथन किया। कांग्रेस के हवाले से इस खबर को बड़े हिंदी दैनिक में पढ़ने वाले उत्तर प्रदेश के कांग्रेसियों कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में हार का कारण वोटर नहीं है। हरियाणा और महाराष्ट्र में हार का कारण वोटर हो ही नहीं सकते। भाजपा नीति सरकार ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया है कि वोटर बड़े मत से अफल सरकार को फिर चुने। इस तथ्य से पीएम मोदी भी परिचित हैं। इसीलिए महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री और सरकार बनाने में देरी होक्षरही है। हरियाणा में भी मुख्यमंत्री के अच्छे कार्य के बदौलत भाजपा नहीं जीती थी। इसलिए हरियाणा का भी मुख्यमंत्री बदल दिया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भाजपा की जीत का श्रेय नहीं दिया जा रहा है।
दिग्गज विषलेषक और कांग्रेसी योगेंद्र यादव कहते है कि महाराष्ट्र का चुनाव परिणाम अविश्वसनीय है।























