झारखंड – लगता है कि हेमंत सोरेन का रथ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण हांक रहे थे
विधानसभा की 81 सीटों के चुनाव परिणाम ने एक बार फिर से हेमंत सोरेन को राज्य की कुर्सी सौंप दी
मीरा प्रवीण वत्स/प्रतिभा सिंह, विशेष संवाददाता, नजरिया न्यूज, 25नवंबर।
राज्य में जेएमएम नेता और मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैसे कमाल किया। लगता है कि उनका रथ भगवान श्रीकृष्ण स्वयं हांक रहे थे। उन्होंने तक़रीबन अकेले दम पर बीजेपी के तमाम दिग्गज़ों को मात दी है।
यह एकमात्र राज्य रहा है जहां विधानसभा चुनावों में विपक्ष के इंडिया गठबंधन के लिए अच्छी ख़बर आई है।
झारखंड में बीजेपी की तरफ से ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जैसे नेताओं ने प्रचार किया था।
झारखंड में हुए विधानसभा चुनावों में हेमंत सोरेन की जेएमएम को 34 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को 16 और राष्ट्रीय जनता दल को 4 सीटें मिली हैं।
झारखंड के वरिष्ठ पत्रकारों का विचार है :
लगता है कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं हेमंत सोरेन का रथ हांक रहे थे। मतदाताओं ने साबित कर दिया है कि आदिवासियों के सबसे बड़े हेमंत सोरेन हैं। उन्होंने झारखंड में आदिवासी-मूलवासी का मुद्दा उठाया और ख़ुद को धरतीपुत्र बताया, जिसमें जनता उनके साथ रही।
झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में 28 सीटें ऐसी हैं जिन पर आदिवासी वोटरों का दबदबा है। इन सीटों पर तीन दशक से भी ज़्यादा समय से जेएमएम का वर्चस्व रहा है।
साल 2019 के पिछले विधानसभा चुनावों के समय 28 में से महज़ दो सीट पर ही बीजेपी की जीत हुई थी और इस बार वहां भी बीजेपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा को चुनौती नहीं दे पाई है।
बीजेपी ने झारखंड में आदिवासियों को रिझाने की पूरी कोशिश की. उसने जेएमएम के पुराने नेता चंपई सोरेन को भी अपने पाले में खींच लिया, लेकिन फिर भी आदिवासी नेता के तौर पर हेमंत सोरेन को कोई चुनौती नहीं दे पाया।
झारखंड में 18वर्षों से ऊपर की महिलाओं को मिलता है एक हजार रुपये
हेमंत सोरेन की इस जीत में राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की भी बड़ी भूमिका मानी जाती है।राज्य की हेमंत सरकार 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये देती है।




















