मीरा प्रवीण वत्स, विशेष संवाददाता, नजरिया न्यूज, 19नवंबर।
1955 में परिवार के बड़े बेटे विनय सिंह ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास की थी। वे रिटायरमेंट के समय बिहार के मुख्य सचिव थे। 1914 में गांव के पहले अफसर बने थे मुस्तफा हुसैन।1914 में मोहम्मद मुस्तफा हुसैन डिप्टी कलेक्टर बने थे। मशहूर शायर रहे वामिक जौनपुरी के वे पिता थे। स्वतंत्रता के बाद 1952 में इंदु प्रकाश सिंह गांव के पहले आईएएस अफसर बने। वे फ्रांस सहित कई देशों में राजदूत रहे। 1955 में विनय कुमार सिंह बिहार के मुख्य सचिव रहे।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का माधोपट्टी गांव अफसरों से भर गया है। इस गांव में सिर्फ आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अफसर ही जन्म लेते हैं। 75 परिवार वाले इस गांव में 47 आईएएस है, जो उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य राज्यों में अपनी सेवायें दे रहे हैं। स्वतंत्रता से पहले से ही यहां के लोग प्रशासनिक सेवाओं में जाने लगे थे।
ज्ञान गुण सागर बजरंगबली हनुमानजी का धाम विजेथुआ से पूर्व चार किमी दूरी पर बिरैली ग्राम पंचायत से जौनपुर जिले की सीमा शुरू हो जाती है।
वहीं जौनपुर जिला मुख्यालय से 11 किलोमीटर दूर पूर्व में स्थित माधोपुरपट्टी गांव स्थित है।
इस गांव के लगभग हर घर में ज्ञान गुण सागर की बारिश हो रही है। हल घर में कोई न कोई आईएएस व पीसीएस अफसर है।
न केवल प्रशासनिक सेवाओं में बल्कि गांव से निकले होनहार भाभा एटामिक सेंटर, इसरो, मनीला और इंटरनेशनल बैंक जैसे संस्थानों में ऊंचे पदों पर हैं।
सिरकोनी विकास खंड के माधोपुर पट्टी गांव में त्यौहारों पर गांव की हर गली में लाल-नीली बत्तियों वाली गाड़ियां ही नजर आती हैं। गांव की आबादी करीब 800 है, जिसमें सबसे ज्यादा संख्या राजपूतों की है।
माधोपुर पट्टी गांव का एक बड़ा सा प्रवेश द्वार गांव के खास होने का अहसास कराता है। यह गांव देश के दूसरे गांवों के लिए रोल मॉडल है। खास बात यह है कि इस गांव में कोई भी कोचिंग इंस्टीट्यूट नहीं है, बावजूद कड़ी मेहनत और लगन से युवा बुलंदियों को छू रहे हैं।
माधोपट्टी के विषय में एक सेवानिवृत्त महिला शिक्षक ने बताया:
, इंटरमीडिएट से ही आईएएस और पीसीएस की तैयारी वहां के बच्चे शुरू कर देते हैं।
एक ही परिवार में पांच आईएएस हैं।
माधोपट्टी गांव में एक ही परिवार के चार भाइयों ने आईएएस परीक्षा पास कर अनोखा रिकॉर्ड बनाया है। 1955 में परिवार के बड़े बेटे विनय सिंह ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास की थी। रिटायरमेंट के समय वह बिहार के मुख्य सचिव थे। भाई छत्रपाल सिंह और अजय कुमार सिंह भी 1964 में आईएएस बने थे। फिर 1968 में सबसे छोटे भाई शशिकांत सिंह ने यूपीपीएससी की परीक्षा पास की थी। पांचवां आईएएस भी इसी परिवार से मिला। 2002 में शशिकांत के बेटे यशस्वी ने प्रतिष्ठित परीक्षा में 31वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने थे।
बहू बेटियों ने भी बढ़ाया मान
माधोपट्टी गांव के बेटे ही नहीं बेटियों और बहुओं ने भी गांव का मान बढ़ाया है। 1980 में आशा सिंह, 1982 में ऊषा सिंह, 1983 में इंदू सिंह और 1994 में सरिता सिंह आईपीएस चुनी गई थीं। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में गांव की बहू-बेटियों ने नौकरी हासिल की है।





















