- अधिकारी किसी काश्तकार कहीं भी चक दे सकते हैं और यमराज बिना उम्र -आयु देखे किसी को भी यमलोक में बुला सकते हैं: रिपोर्ताज
*अनिल उपाध्याय, नजरिया न्यूज विशेष संवाददाता जौनपुर, 09नवंबर*
: उत्तर प्रदेश में चकबंदी के दौरान रैयत को इंसाफ देने के लिए राज्य सरकार को चाकचौबंद व्यवस्था करनी पड़ी है। न्यायिक प्रक्रिया में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की क्या भूमिका होती है, यह जानकारी उक्त वीडोयो में देते डीएम के रोल की भी जानकारी दी गई है।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के कादीपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत पाकरपुर में चकबंदी चल रही है। न्याय प्राप्त करने में रैयत को गहना तक गिरवी रखना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत पाकरपुर निवासी संतोष वर्मा और जगदीश सिंह का मामला बतौर केस स्टडी लिया जा सकता है।
*पहले संतोष वर्मा का मामला*:
संतोष वर्मा को एसीओ, सीओ और एसओसीसी के स्तर से अपने घर के सामने आबादी और नलकूप से सटा हुआ चक मिला। लेकिन डीडीसी ने संतोष वर्मा का चक उनके चचेरे भाई का दे दिया। यहां उल्लेखनीय है कि उक्त चक डीडीसी ने जिसे दिया है, उनका घर उस चक से दूर था।
*जगदीश सिंह का मामला* अपने घर के सामने आबादी सटा हुआ चक सीओ और डीडीसी ने दिया है। वहीं एसीओ और एस ओसीसी(बंदोबस्त अधिकारी) ने जगदीश सिंह के पड़ोसी को जगदीश सिंह के सामने चक दिया है।
उल्लेखनीय है घर के सामने आबादी से सटा हुआ छह विश्वा का छक डीडीसी से पाकर जगदीश सिंह ख़ुश हैं। वहीं संतोष वर्मा अपने घर के ठीक पीछे आबादी से सटा हुआ 16विश्वा का डीडीसी स्तर पर छिन जाने से दुखी हैं।
गांव वाले कह रहे हैं कि जिस प्रकार यमराज के द्वारा किसी जीव को ऊपर बुलाने का कोई कानून नहीं है। उसी प्रकार उत्तर प्रदेश चकबंदी विभाग का कोई कानून नहीं है। अधिकारी के सामने काश्तकारों उतना ही विवश हैं जितना यमराज के कानून के समक्ष बूढ़ा, बच्चा, जवान पुरुष और महिलाएं।























