आदित्य दत्ता नजरिया न्यूज़ रानीगंज
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा रानीगंज में विजयदशमी के अवसर पर भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन न केवल शक्ति और संगठन के प्रदर्शन का प्रतीक था, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को संरक्षित रखने के संघ के उद्देश्यों को भी रेखांकित करता है।पथ संचलन की शुरुआत रानीगंज के एक प्रमुख स्थल से हुई, जहाँ स्वयंसेवकों ने अनुशासन और उत्साह का परिचय देते हुए नगर के प्रमुख मार्गों का भ्रमण किया। सफेद शर्ट, खाकी पैंट और हाथों में लाठी लिए स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाते हुए आगे बढ़ रहे थे।
हर कदम के साथ राष्ट्रभक्ति की भावना और संगठन की एकजुटता का संदेश जन-जन तक पहुँच रहा था।इस आयोजन का मुख्य आकर्षण संघ का शस्त्र पूजन समारोह था, जो विजयदशमी के दिन पारंपरिक रूप से किया जाता है। इस पूजन के तहत शस्त्रों की पूजा कर उन्हें शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। शस्त्र पूजन के दौरान संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्वदेशी और स्वाभिमान के महत्व को रेखांकित किया, साथ ही युवाओं को राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित करने की बात कही।पथ संचलन के दौरान रानीगंज के प्रमुख मुख्य मार्गों पर जनसमूह उमड़ पड़ा।
लोग संघ के अनुशासन और देशभक्ति के इस प्रदर्शन को देखने के लिए उत्सुक थे। इस आयोजन में अररिया जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों स्वयंसेवक शामिल हुए, जिससे संघ के प्रति लोगों की बढ़ती आस्था और समर्थन का परिचय मिलता है।इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने समाज में समरसता, सेवा, और स्वदेशी विचारधारा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विजयदशमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है, और हमें इसे हर क्षेत्र में लागू करने की आवश्यकता है।संघ का यह पथ संचलन न केवल संगठन की शक्ति और अनुशासन का प्रदर्शन था, बल्कि यह समाज में राष्ट्रवाद और भारतीयता के विचार को और मजबूत करने का प्रयास भी था।























