संवाददाता। कुशेश्वरस्थान दरभंगा / गोविन्द पोद्दार
पूर्वी प्रखंड क्षेत्र में पितृपक्ष के पांचवें दिन रविवार को विभिन्न तालाबों, नदियों और जलाशयों में पितरों के तर्पण करने वाले श्रद्धालुओं का भीड़ लगी रही। जहां पंडितों ने मंत्रोच्चारण के बीच लोगों को उनके पितरों को विधि विधान के साथ तर्पण कराया। कुशेश्वरस्थान शिव गंगा घाट पर ज्योतिषाचार्य पंडित कमलेश झा ने पांच दर्जन से अधिक लोगों को उनके पितरों को तर्पण कराया। मालूम हो कि पितृपक्ष का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। यह समय पितरों के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में लोग अपने पितरों की पूजा और उनका तर्पण करते हैं। इस महत्वपूर्ण अवधि को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। पितृपक्ष अश्वीन माह के कृष्ण पक्ष के प्रतिपदा से शुरू होती है और अमावस्या को समाप्त होता है। पंडित आचार्य राजनारायण झा ने बताया कि इस वर्ष पितृपक्ष 18 सितंबर को ही अगस्त्य तर्पण एवं पितृ तर्पण प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलेगा। 2 अक्टूबर को अमावस्या तिथि के पितृ श्राद्ध के बाद कुश त्याग कर पितृ विसर्जन कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिता के मृत्यु तिथि को ही पार्वण श्राद्ध करना चाहिए। इससे पितर प्रसन्न होकर सदैव आशीर्वाद देते हैं। कहा कि हिन्दू धर्म संस्कृति की पारंपरिक पद्धति में देवताओं के समान पितरों को भी तर्पण-अर्पण दान-पूजन करने की व्यवस्था शास्त्र एवं व्यवहार में प्रशस्त है। जिस प्रकार देवता के लिए स्वाहा शब्द का प्रयोग होता है उसी तरह पितर के लिए स्वधा शब्द की प्रयोज्य है। पितरों की तृप्ति और प्रसन्नता के लिए श्रद्धापूर्वक जो कर्म संपादित होता है उसे श्राद्ध कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग श्रद्धाभाव के साथ अपने पितरों को तर्पण, पिण्ड दान व दान पुण्य करते हैं उन्हें धन,सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में खुशहाली आती है।























