रूबी विनीत, नज़रिया न्यूज़, अररिया।
स्पीडी ट्रायल के तहत 05 वर्ष पूर्व दुष्कर्म कर चाकू से गौद गौद कर जख्मी कर देने के बाद इलाज के क्रम में मृत्यु हो जाने का मामला प्रमाणित होने पर एडीजे-01 मनोज कुमार तिवारी ने आरोपी को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है।
40 वर्षीय आरोपी फकरुद्दीन पिता ग्यास उर्फ गयासुद्दीन जिले के ताराबाड़ी थाना क्षेत्र के सोगना गांव का रहनेवाला है।
यह सजा एसटी 230/21 मे सुनाया गया है।
इस संबंध में सरकार की ओर से एपीपी राजा नंद पासवान ने बताया कि घटना 06 मई 2019 को 11 बजे दिन की है। आरोपी फकरुद्दीन ने 20 वर्षीय मृतिका रौशन खातून पति स्वर्गीय सलाउद्दीन को उसका पहचान पत्र व उसके स्वर्गीय पति सलाउद्दीन का मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर आने कहा था। जब मृतिका रौशनगोला चौक पहुँची तब आरोपी ने मृतिका रौशन को टैम्पू मे बैठाकर अररिया जीरोमाइल लेकर चला आया।
जब मृतिका रौशन ने puchaa की उसे लेकर कहा जा रहे हैं तो आरोपी ने उससे कहा कि उसे लेकर दिल्ली जा रहे हैं।
मृतिका द्वारा दिल्ली जाने की बात पर घोर विरोध किया गया तो आरोपी ने मृतिका के मुह पर कपड़ा बांध दिया और मटियारी चौक पर उसे टैम्पू से उतार लिया।
उसके बाद जबर्दस्ती आरोपी ने मृतिका रौशन को पास के मकई खेत मे ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।
दुष्कर्म करने के बाद आरोपी ने मृतिका रौशन के बदन मे चाकू से कई वार किया तथा यह सोचकर कि वह मर गई है , उसके शरीर पर मकई का डंठल, पत्ता वगैरह को डाल कर ढक कर भाग गया।
इधर जख्मी रौशन खातून को लोगो की मदद से अस्पताल लाया गया तथा बेहतर इलाज के अभाव में पीड़िता रौशन खातून की मृत्यु हो गई।
मौत के पहले पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी फकरुद्दीन व उसके पिता ग्यास उर्फ गयासुद्दीन के विरुद्ध महिला थाना कांड संख्या 43/2019 दर्ज किया गया था।
कोर्ट में सभी गवाहो ने घटना का पूर्ण समर्थन किया। गवाहो के बयान से संतुष्ट होकर न्यायालय के न्यायधीश श्री तिवारी ने आरोपी को भादवि की धारा 302 व 376 (।।) मे आरोपी को दोषी करार दिया।
सज़ा के बिन्दु पर एपीपी राजा नंद पासवान ने ऐसा जघन्य अपराध करने पर आरोपी को सज़ा ए मौत (फांसी) देने की अपील की। जबकि बचाव पक्ष के वरीय अधिवक्ता मो मंजूर आलम व महिला अधिवक्ता मेनिका कुमारी ने कम से कम सज़ा देने की गुहार लगायी।
दोनो पक्षो की दलीलें सुनने के बाद न्यायलय के न्यायधीश मनोज कुमार तिवारी ने आरोपी को भादवि की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई, वही, भादवि की धारा 376 (।।) के तहत आजीवन कारावास की सज़ा तबतक जबतक आरोपी का जीवन है, जेल में ही रहेगा, यानी अंतिम सांस तक जेल में रहना है।
न्यायलय के न्यायधीश मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी।
बताते चले कि आरोपी इस मामले में पिछले 04 वर्ष 10 महीना व 12 दिनों से जेल सुरक्षा में बंद है।




















