बीबीसी की एक रिपोर्ट आज से एक वर्ष पहले आई थी कि 100वर्ष तक जीवित रहने का नुस्खा क्या है?29 मार्च 2024 को बिहार प्रदेश के किशनगंज जिले के सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी कुंदन कुमार सिंह की एक रिपोर्ट में बताया गया कि लोकसभा चुनाव 2024 में 85वर्ष से अधिक आयु के 7065मतदाता अपने घर पर ही मतदान करेंगे…
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दुर्केश सिंह/बीरेंद्र पांडेय/वीरेंद्र चौहान, नजरिया न्यूज, किशनगंज, 30मार्च।
एक वर्ष पहले आज की ही तारीख। बीबीसी की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट आती है: 100वर्ष तक जीवित रहने का नुस्खा क्या है? एक रिपोर्ट मोदीकेयर कंसल्टेंट डॉ.सदानंद त्रिपाठी और डॉ.बच्चाराम पांडेय की भी इसी पर आई थी। दोनों एक मीटिंग में बोल रहे थे। ऐसी ही रिपोर्ट ईश्वरीय विश्वविद्यालय से बीके डॉ.मोहित गुप्ता की भी आई थी। आइए जानते हैं 100वर्ष तक जीने का नुस्खा क्या है?:
बीबीसी पड़ताल में मोहनलाल शर्मा निष्कर्ष बताते हैं कि शरीर की देखभाल अच्छी तरह से करें। इसकी जरूरत 100वर्ष तक पड़ सकती है।
किशनगंज की बुजुर्ग महिला और प्रशासनिक पदाधिकारी
जापान का एक गांव। तारीख दो जनवरी 1903।एक बच्ची का जन्म हुआ। नाम रखा गया कनी रखा गया। अप्रैल 1922में 122वर्ष बाद कनी की मौत हुई। आधिकारिक तौर पर वे दुनिया की सबसे उम्रदराज शख्स थीं। वे सुबह उठतीं थी। गणित का स्वागत हल करतीं थीं। चाकलेट खाती थीं। काफी और सोडा पीती थीं।
एक समय ऐसा था बड़े बुजुर्ग 100साल तक जीवित रहने का आशीर्वाद देते थे। लेकिन सच होना नामुमकिन माना जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। बिहार का किशनगंज इसका उदाहरण है। वहीं जापान की महिलाओं की औसत आयु 88 और पुरुषों की 82वर्ष है।
जापान में 100वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या 86हजार से अधिक है। इसका पहला कारण आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं हैं। दूसरा कारण है जापान के लोग स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहते हैं। जापान के लोग खुब मेहनत करते हैं। दिल और कैंशर की बीमारी से बचने के लिए सावधानियां बरतते हैं।
जापान के लोग खान-पान पर विशेष ध्यान देते हैं।फैट का सेवन कम करते हैं। मछलियां और सब्जियां बेड टी का इस्तेमाल करते हैं।
जापानीज सरकार द्वारा पेंशन, हाउसिंग और ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर ध्यान दिया गया है। समाज से जुड़े रहने और सक्रिय रहने के ढांचे पर ध्यान दिया गया है। सभी लोग सभी के लिए काम करें, ऐसा माहौल बनाया गया है। इससे प्रेरित होकर बुजुर्ग नई नौकरियां शुरू कर रहे हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद प्रोफेसर कंपनी बनाकर खेती शुरू कर रहे हैं।
बुढ़ापा की परिभाषा पर एक्सपर्ट कहते हैं:
बुढ़ापा,शरीर पर झुर्रियां पड़ना और बालों का सफेद होना ही नहीं है्। शरीर के आंख से लेकर प्रजनन अंगों तक कोशिकाएं प्रोटीन क्वालिटी में कमी से जूझती है।
कोशिकाओं का वह हिस्सा जो ऊर्जा निर्माण का कार्य करती हैं, काम करना बंद कर सकती हैं।स्टेम सेल मर जाते हैं। दिमाग में भी बदलाव आते हैं। दिमाग का आकार छोटा हो जाता है। इसकी वजह से याददाश्त कमजोर हो जाती है।
100वर्ष तक स्वस्थ रहने के लिए सक्रिय जीवन सबसे अधिक मददगार है। वैज्ञानिक उस बायो मार्कर की तालश में हैं जो बायोलॉजिकल आयु बता सकें। सामाजिक सरोकार रखने वालों की, आस-पड़ोस से जुड़े रहने वाले व गर्मजोशी भरा जीवन जीने वालों की आयु लंबी देखी जा रही है।यह अध्ययन मनोवैज्ञानिक डॉ. रॉबर्ट बैल्डिंगर का है। वे 84वर्षों से 724लोगों पर अध्ययन करके इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि उन 724लोगों में 90से 100वर्ष आयु के कुछ लोग अभी भी जिंदा हैं।
इस अध्ययन से कुछ ऐसी बातें सामने आईं:
पौष्टिक आहार लेना और लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें लंबी उम्र जीने में मददगार हैं।तनाव और तनाव पर काबू पाना ही होगा। दूसरे के लिए ईमानदारी से काम करने वाले लंबी आयु जी सकते हैं। क्योंकि सामाजिक सरोकार तनाव कम कर सकता है। भरोसेमंद साथी से बातचीत करने से शरीर की जकड़न कम हो जाती है। गुस्सा समाप्त हो जाता है। अकेले व्यक्ति का ग़ुस्सा कभी उतरता ही नहीं है। इसलिए शरीर की देखभाल करें, इसकी जरूरत 100 साल तक पड़ सकती है।
उम्र बढ़ाते हैं दोस्त:
जो दूसरों से जुड़े रहते हैं और खुशी तथा आनंद भरा जीवन जीते हैं। उनकी उम्र लंबी होती है। बीबीसी की इस पड़ताल पर
मोदीकेयर कंसल्टेट डॉ.बच्चाराम पांडेय और डॉ.सदानंद त्रिपाठी कहते हैं :
बुढ़ापा एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है। बीमारियों का निदान कराकर 100वर्ष तक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। इसके लिए उपचार और खान-पान के प्राचीन तारीकों को नये रूप में विकसित करने की जरूरत है। मोदीकेयर इंडिया इसी पर काम कर रही है। संयुक्त परिवार की परिभाषा मोदीकेयर चरितार्थ कर रही है।
सामाजिक कार्य, रंग-बिरंगे आहार, गहरी नींद और सोच बदलकर शरीर की दुनिया बदलने की प्रक्रिया की रफ्तार को कम किया जा सकता है। समाज के लिए काम करने से बायोलॉजिकल उम्र कम हो जाती है। पर्यावरण और शरीर की आंतरिक और बाह्य स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
मेडिटेशन के ज्ञान से जीवन में आएगी खुशी:
कार्डियो सर्जन ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिक्षक बीके डॉ. मोहित गुप्ता भी हमेशा खुश रहना और आनंद में रहना, व्यायाम करना, मेडिटेशन करना, गहरी निद्रा, रंग-बिरंगी सब्सियों का सेवन करना, तनावमुक्त जीवन का आधार बताते हैं।
बागवान के लिए जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम किशनगंज तुषार सिंगला की पहल:
लोक सभा आम निर्वाचन 2024 के अंतर्गत पोस्टल बैलेट हेतु 85 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के मतदाता को फॉर्म 12 डी का वितरण किया जा रहा है । इसी क्रम में ज़िला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिलाधिकारी श्री तुषार सिंगला ने 85 वर्ष से अधिक आयु के 99 वर्षीय मतदाता जैतून निशा , पति मिठू मिया मरहूम,रूई धासा, किशनगंज को फॉर्म 12 डी हस्तगत कराया ।
विदित हो कि ज़िले में 85 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के मतदाता की संख्या 7065 है । ऐसे मतदाताओं को घर पर ही अपने मताधिकार का प्रयोग करने का विकल्प दिया गया है । जिलाधिकारी के निर्देश पर ज़िले के सभी जिलास्तरीय पदाधिकारी एवं अन्य पदाधिकारी के द्वारा फॉर्म 12 डी का वितरण किया जा रहा है ।























