स्कूली बच्चों को कृमि नाशक दवा खिलाकर सिविल सर्जन ने किया अभियान की शुरुआत
अररिया, 15 मार्च ।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के मौके पर गुरुवार को 01 से 19 साल तक के बच्चों को कृमि नाशक दवा का सेवन कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को जिले में विशेष अभियान संचालित किया गया। इसे लेकर मिडिल स्कूल अररिया बाजार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह व जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी सह कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ मोईज ने स्कूली बच्चों को कृमि नाशक दवा खिलाकर अभियान का विधिवत उद्द्घाटन किया। मौके पर एमओआईसीस अररिया पंकज कुमार निराला, बीएचएम खतीब अहमद, बीसीएम डोली सिंह सहित संबंधित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी, स्कूली शिक्षक व छात्र उपस्थित थे।
कृमि के कारण प्रभावित होता है बच्चों का सर्वांगीण विकास
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने स्कूली बच्चों को कृमि नाशक दवा सेवन के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि पेट में पल रहे कृमि का बच्चों की सेहत पर दूरभागमी प्रभाव पड़ता है। इससे बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित होता है। इसलिये नियमित समयांतराल पर कृमि नाशक दवा का सेवन जरूरी है। सिविल सर्जन ने स्कूली बच्चों को खुद दवा का सेवन करते हुए संपर्क के अन्य बच्चों को भी दवा सेवन के लिये प्रेरित करने के लिये कहा।
जिले में 17.56 लाख बच्चों का दवा सेवन कराने का लक्ष्य
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी सह अभियान के नोडल अधिकारी डॉ मोईज ने कहा कि अभियान के क्रम में 01 से 19 साल तक के जिले के 17 लाख 56 हजार बच्चों को दवा सेवन कराने का लक्ष्य निर्धारित है। अभियान में छूटे बच्चों को दवा सेवन कराने के लिये आगामी 19 मार्च को मॉपअप राउंड संचालित किया जायेगा। कृमि संक्रमण से बचाव के लिये उन्होंने हाथों की सफाई व व्यक्तिगत स्वच्छता का महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 01 से 05 साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से निर्धारित मात्रा में कृमि नाशक दवा अल्बेंडाजोल का सेवन कराया जायेगा। वहीं 06 से 19 साल तक के बच्चों को स्कूलों के माध्यम से दवा खिलाया जाना है। आंगनबाड़ी केंद्र में अनामांकित व विद्यालय नहीं जाने वाले बच्चों को चिह्नित कर इसकी सूची तैयार की गयी है। जिन्हें संबंधित आशा, एएनएम व सेविका के माध्यम से दवा का सेवन कराया जायेगा।
निर्धारित समयांतराल पर दवा सेवन जरूरी
पीएचसी अररिया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पंकज कुमार निराला ने बताया कि दूषित पेयजल, अशुद्ध खान-पान व शारीरिक स्वच्छता के प्रति उदासीनता के कारण बच्चों में कृमि संक्रमण का खतरा अधिक होता है। निर्धारित समयांतराल पर कृमिनाशक दवा का सेवन किये जाने से कृमि के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। दवा सेवन से बच्चों को कृमि जनित बीमारियों से बचाया जा सकता है।























