-एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ता का एक दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
-प्रशिक्षण में कुल 2507 आशा कार्यकर्ता, 121 आशा फैसिलिटेटर व 274 एएनएम लेंगी भाग
अररिया, 7 मार्च ।
गैर संचारी रोग यानी एनसीडी ऐसी दीर्घकालिक बीमारी है। जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। कैंसर, हृदय संबंधी रोग, श्वसन संबंधी पुरानी बीमारी, डायबिटीज, बल्ड प्रेशर गैर संचारी रोगों की सूची में शामिल हैं। एनसीडी रोगों का प्रभाव दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है। जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के लिये बड़ी चुनौती है। जो देश में होने वाली मौत के बड़े कारणों में से एक है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक देश में होने वाली सभी मौतों में एनसीडी का योगदान 66 फीसदी है। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग गैर संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण व इसके कुशल प्रबंधन के प्रयासों में जुटा है। ताकि इससे संबंधित मौत के मामलों में कमी लाया जा सके। इसे लेकर केंद्र सरकार द्वारा नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर, डायबिटीज, कार्डियो वैस्कूलर डिजीज व स्ट्रोक यानी एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। एनसीडी रोगों के प्रति जागरूकता व इसकी रोकथाम कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। निर्धारित उद्देश्य की प्राप्ति के लिये पॉपुलेशन बेस्ड मास स्क्रीनिंग फॉर एनसीडी के तहत आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से जिले में 30 साल से अधिक उम्र के तमाम लोगों की स्क्रीनिंग की जानी है। इसे लेकर सभी आशा कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। सदर अस्पताल में दिये जा रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 88 बैच में जिले की कुल 2507 आशा कार्यकर्ता, 121 आशा फैसिलिटेटर व 274 एएनएम को प्रशिक्षित किया जाना है।
एनसीडी रोगों की रोकथाम व उपचार सेवाएं होगा प्रभावी
प्रशिक्षण के संबंध में सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि गैर संचारी रोगों की पहचान व इसके इलाज में लोगों को जरूरी मदद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि आशा संबंधित अपने क्षेत्र में 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के तमाम लोगों की जांच कर सी-बैक फार्म व फैमिली फॉल्डर में दर्ज करेंगी। इसे एनसीडी एप्लीकेशन पर अपलोड किया जायेगा। बीमारी की पुष्टि होने पर नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान के माध्यम से रोगी को समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध कराया जायेगा।
कई कारणों से बढ़ रहा एनसीडी रोगों का प्रसार
एसीएमओ डॉ राजेश कुमार ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ, अस्वास्थकर आहार, शारीरिक गतिविधियों में कमी, उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा, उच्च कॉलेस्ट्रोल, अधिक वजन सहित अन्य कारणों से एनसीडी रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। आमतौर पर ये रोग अनुवांशिकी, शारीरिक, पर्यावरण व जीवनशैली से जुड़े विसंगतियों के कारण लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। गैर संचारी रोगों को दीर्घ कालिक बीमारी के रूप में जाना जाता है। क्योंकि ये लंबे समय तक बना रहता है। लिहाजा गैर संचारी रोगों के खतरों को लेकर जन जागरूकता फैलाते हुए जनसंख्या आधारित स्क्रीनिंग या जांच को बढ़ावा दिया जा रहा है। 30 साल से अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों को समुचित चिकित्स्कीय सुविधा मुहैया कराया जा सके।
कुल 88 बैच में 2902 स्वास्थ्य कर्मियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में एनसीडी कार्यक्रम के एफएलसी प्रभात रंजन ने बताया कि एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम के तहत आशा, आशा फैसिलिटेटर, एएनएम को संयुक्त रूप से विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं को दिये जा रहे इस एक दिवसीय प्रशिक्षण में सी बैक, फैमिली फॉल्डर व एनसीडी एप से संबंधित जरूरी जानकारी दी जा रही है। ताकि वे सफलता पूर्वक व अने कार्य व दायित्वों का निवर्हन कर सकें।























