जमीन रजिस्ट्री के नये नियम ने बढ़ा दी परेशानी
विक्रेता के नाम से जमाबंदी होना जरूरी
दाखिल खारीज कराने में कई कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है
वीरेंद्र चौहान,नजरिया ब्यूरो किशनगंज, 27फरशरी ।
भूमि निबंधन नियमों में बदलाव से परेशानी कम होने के बजाय बढ़ गयी है।नये नियम के मुताबिक अब जमीन बेचने के लिए विक्रेता के नाम से जमाबंदी दर्ज होना जरूरी है। इसके अलावा जमाबंदी का आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से लिंक होना भी जरूरी है।अगर ऐसा नहीं हुआ तो जमाबंदी को जोनल कार्यालय द्वारा लॉक कर दिया जायेगा।ऐसी स्थिति में रैयत केवल रसीद ही निर्गत कर सकेंगे और जमीन की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे।इसलिए अब जमाबंदी अपने नाम से दर्ज करना जरूरी हो गया है।
बढ़ी रही लोगों की परेशानी
जमीन बेंचने एवं खरीदने वाले लोग इस नए नियम से काफी परेशान हैं।जिला निबंधन कार्यालय में ऐसे लोगों ने बताया:
अगर कोई हॉस्पिटल में एडमिट हो,बीमार हो या अन्य जरूरी काम हो, नये नियम के बाद खरीद-बिक्री में परेशानी बहुत बढ़ गई है।
कई जमीन मालिकों ने जमीन बेंचने के लिए अग्रिम राशि ले ली है, लेकिन अचानक नियम बदल जाने के कारण जमीन की रजिस्ट्री कैसे होगी इस विषय को लेकर जमीन खरीदने एवं बेंचने वाले बेचैन है।
अधिकांश जमीन की जमाबंदी मृतक बाप दादा के नाम पर है।कई लोग बड़े परिवार होने के कारण मौखिक रूप से जमीन को बांट कर जोत आबाद कर रहे हैं। पुराने लोगों के नाम से जमाबंदी होने के कारण अब वह जमीन को कैसे बेंच या खरीद सकते हैं।इसकी चिंता बनी हुई है।
वहीं अपने नाम से जमाबंदी दर्ज कराने में कई महीना और कई प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अगर दस्तावेज में खामियां रह गई तो अस्वीकृत कर दिया जाता है उसके बाद डीसीएलआर कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ता है।
जानकरों का कहना है नया नियम लागू करने से सरकार को पहले जमाबंदी अप टू डेट करना चाहिए। जमीन रजिस्ट्री का नया नियम लागू होने के बाद लोगों के लिए जमीन की जमाबंदी को आधार और मोबाइल नंबर से लिंक कराना जरूरी हो गया है।
भूमि निबंधन नियमों में बदलाव से आम लोगों की परेशानी बढ़ गयी है। नये नियम के मुताबिक अब जमीन बेंचने के लिए जमाबंदी जरूरी है।इसके अलावा जमाबंदी का आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से लिंक होना भी जरूरी है।
लोगों का मानना है कि इस तरह की जटिल प्रक्रिया अधिक दिन तक नहीं टिक पायेगी।अभी भी अधिकांश जमीन की जमाबंदी बाप दादा के नाम से ही है।कई लोग बड़े परिवार होने के कारण मौखिक रूप से जमीन को बांट कर जोत आबाद कर रहे हैं।पुराने लोगों के नाम से जमाबंदी होने के कारण अब वह जमीन को कैसे बेच या खरीद सकते हैं। इसकी चिंता बनी हुई है।जमाबंदी कराने में हो रही है कठिनाई।
अधिकांश जमीन की जमाबंदी उनके नाम से है, जिनकी मौत वर्षों पूर्व हो चुकी है।सबसे बड़ी बात यह है कि पुराने लोगों के नाम से जमाबंदी होने के कारण दो-दो पुश्त तक अपने नाम से जमाबंदी नहीं करायी गयी है
इसके साथ ही अधिक सदस्य वाले परिवार भी बंट चुके हैं।ऐसे में अपने नाम से जमाबंदी कराने में उन्हें कई प्रकार के झमेले का सामना करना पड़ सकता है।
अधिकांश जमीन की जमाबंदी उनके नाम से है, जिनकी मौत वर्षों पूर्ण हो चुकी है।सबसे बड़ी बात यह है कि पुराने लोगों के नाम से जमाबंदी होने के कारण दो-दो पुश्त तक अपने नाम से जमाबंदी नहीं करायी गयी है। वही निबंधन पदाधिकारी प्रमोद कुमार से पूछने पर बताएं की नया नियम लागू हो गया है जिसके नाम जमाबंदी रसीद रहेगा वही रजिस्ट्री कर सकते हैं। उन्होंने कहा प्रतिदिन 40 से 50 रजिस्ट्री हो जाती थी आज एक अब तक आई है।























