मुख्यमंत्री कार्यालय से जनसुनवाई के लिए प्रबंधक ब्रह्मजीत ने लगाई गुहार
डीएम जौनपुर से पांच महीने पहले की गई शिकायत पर आज तक नहीं हुई कार्रवाई
सोसायटी ऐक्ट 1860के नियम और उपनियम में प्रावधान नहीं है कि किसी संस्था का नाम डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी बदल दें। नया पंजीकरण नंबर जारी कर दें। संस्था का बाइलाज बदल दें। संस्था के सभी पदाधिकारियों को संस्था से हटा दें। लेकिन संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नवीनीकरण के लिए दायरे वाद के फैंसले में डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह के ऐसे कुकृत्य को विधि सम्मत ठहराया है…
मनोज सिंह, संवाददाता नजरिया न्यूज शाहगंज, जौनपुर, 17अप्रैल 2026।
संस्कृति कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नाम से रजिस्ट्रार उत्तर प्रदेश और डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी की मिलीभगत से 1982में नई संस्था का पंजीकरण कराया गया है। यह नई संस्था आज भी झोले में चल रही हैं। वहीं संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नाम से भानु प्रताप सिंह द्वारा दान में दी गई खतौनी का दस्तावेज जन सुनवाई के लिए प्रेषित आवेदन के साथ संलग्न किया गया है। आवेदन के मुताबिक 1982में भानु प्रताप सिंह का स्वर्गवास हो गया था।
कृष्णदेव त्रिपाठी,योगेश त्रिपाठी, सतीश त्रिपाठी निवासी अढ़नपुर जौनपुर ने उच्च पहुंच की शक्ति से रजिस्ट्रार उत्तर प्रदेश, डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी को प्रभावित करके संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के पते पर संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पंजीकरण 2006 में करा लिया।
संस्कृत कालेज के प्रबंधक ब्रह्मजीत सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रेषित आवेदन में जानकारी दी है कि 1982से संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के पते पर पंजीकृत नई संस्था के प्रबंधक ने संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के भवन पर कब्जा कर लिया है। इसकी शिकायत डीएम जौनपुर से की गई है। शिकायत के पांच महीने बाद स्कूल के भवन और भूमि पर कब्जा करने वालों पर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है।
उल्लेखनीय है कि संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर संपूर्णानंद संस्कृत संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से 1932से संबंद्ध है। संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर सोसायटी ऐक्ट के तहत 1946 से पंजीकृत हैं।1982में संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर के प्रबंधक भानुप्रताप सिंह का स्वर्गवास हो गया। वर्ष 2010 में संस्था का नवीनीकरण के लिए ब्रह्मजीत सिंह ने आवेदन दिया।
नवीनीकरण के लिए डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी कार्यालय द्वारा दिए गए गाइडलाइन के आलोक में प्रबंधक ब्रह्मजीत सिंह उच्च न्यायालय इलाहाबाद में संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नवीनीकरण के लिए अपील दायर किया। वर्ष 2013में हाईकोर्ट ने नवीनीकरण करने से पहले दोनों पक्षों को सुनने का आदेश डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी को दिया।
तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी वाराणसी सुभाष सिंह सुनवाई कर रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष ने अपनी पहुंच की शक्ति से उनका तबादला करा दिया।
नये डिप्टी रजिस्ट्रार मनोज सिंह ने फैंसला सुनाया। जिसमें
सोसायटी ऐक्ट 1860 से संबंधित कानूनों को ताख पर रखा गया है। वादी को फैंसले से असंतुष्ट होने की स्थिति में शासन के शरण में जाने का परामर्श डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी द्वारा दिया गया है।
स्मरणीय है सोसायटी ऐक्ट 1860के नियम और उपनियम में प्रावधान नहीं है कि किसी संस्था का नाम डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी बदल दें। नया पंजीकरण नंबर जारी कर दें। संस्था का बाइलाज बदल दें। संस्था के सभी पदाधिकारियों को संस्था से हटा दें। लेकिन संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नवीनीकरण के लिए दायरे वाद के फैंसले में डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह के ऐसे कुकृत्य को विधि सम्मत ठहराया है।



















