व्यवहार न्यायालय अररिया के प्रांगण में बुधवार को संविधान दिवस समारोह बड़े ही गरिमामय और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) अररिया, गुंजन पाण्डेय ने की। इस मौके पर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पठन किया गया, जिसमें मौजूद सभी न्यायिक पदाधिकारी, कर्मी और अधिवक्ताओं ने एकस्वर से भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता—के प्रति निष्ठा व्यक्त की।
समारोह की शुरुआत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा प्रस्तावना के वाचन से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संविधान केवल शासन का मार्गदर्शक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है, जो हर नागरिक को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, संवेदनशील एवं जवाबदेह बनाने में सबकी संयुक्त जिम्मेदारी पर जोर दिया।
कार्यक्रम में डीएलएसए सेक्रेटरी रोहित श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि जन-जागरूकता और नागरिक चेतना को मजबूती देने का अवसर है। उन्होंने संविधान के मूल सिद्धांतों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
समारोह के दौरान विधिक जागरूकता से संबंधित जानकारी भी उपस्थित लोगों के बीच साझा की गई। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और सभी ने भारतीय संविधान के आदर्शों को व्यवहार में उतारने का संकल्प लिया।























