नगर थाना पुलिस ने एक ऐसे शातिर युवक को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है, जो पिछले तीन वर्षों से खुद को 2018 बैच का पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) बताकर आम लोगों को डराकर व वर्दी की आड़ में उगाही और ठगी का काम कर रहा था। आरोपी की गिरफ्तारी समाहरणालय परिसर से संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर की गई।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति दारोगा की वर्दी में समाहरणालय परिसर के पास संदिग्ध रूप से घूम रहा है। उसके हाव-भाव और बोलने के तरीके से वह वास्तविक पुलिसकर्मी नहीं लग रहा था। सूचना मिलते ही नगर थानाध्यक्ष मनीष कुमार रजक के नेतृत्व में पुअनि अमरेंद्र सिंह, पुअनि ललित सिंह और सअनि पुष्कर सिंह की टीम मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। कुछ देर की खोजबीन के बाद पुलिस टीम ने निर्वाचन कार्यालय के समीप दारोगा की समरूप वर्दी पहने एक व्यक्ति को बाइक से जाते देखा और उसे रोक लिया।
पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम रणवीर कुमार, 2018 बैच का पुलिस अवर निरीक्षक बताया। लेकिन जब पुलिस अधिकारियों ने उससे वरीय पदाधिकारियों के नाम, प्रशिक्षण काल, नियुक्ति स्थल और थाना कार्य से जुड़े सवाल पूछे तो वह गम्भीर रूप से उलझ गया और कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने उसे वहीं से हिरासत में लेकर नगर थाना ले आई।
सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना असली परिचय बताया। वह मधेपुरा जिला के सिंधेश्वर दुधैला निवासी अर्जुन पासवान का पुत्र है। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह पिछले तीन वर्षों से फर्जी पुलिस अवर निरीक्षक बनकर अररिया, मधेपुरा और आसपास के जिलों में वर्दी का रौब दिखाकर सीधे-साधे और भोले-भाले लोगों को डरा-धमकाकर ठगी और उगाही करता था। आरोपी ने यह भी कबूल किया कि वह जरूरत के मुताबिक अलग-अलग जगह जाकर अपनी पहचान बदलकर वर्दी का दुरुपयोग करता रहा है।
पुलिस ने आरोपी के पास से सब इंस्पेक्टर की वर्दी, नकली पिस्टल तथा एक मोटरसाइकिल बरामद की है। नगर पुलिस थाने ने उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
थानाध्यक्ष मनीष कुमार रजक ने बताया कि ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है और यह गिरफ्तारी आम जनता की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध पुलिसकर्मी या वर्दीधारी पर शक होने पर तुरंत सूचना दें, ताकि ऐसे ठगों पर रोक लगाई जा सके।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि वर्दी की आड़ में अपराध करने वाले गिरोह सक्रिय हैं और पुलिस उनके खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। आरोपी की गिरफ्तारी ने पुलिस की सतर्कता व तत्परता को एक बार फिर साबित किया है।























