नजरिया न्यूज़, अररिया। विकाश प्रकाश।सीमावर्ती जिलों के साथ-साथ जिला मुख्यालय अररिया में शुक्रवार को करवाचौथ का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। भारत-नेपाल सीमा से सटे कुर्साकांटा, सिकटी, भरगामा, जोकीहाट, नरपतगंज, फारबिसगंज और रानीगंज प्रखंड की सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह पर्व अब आधुनिकता के दौर में हर घर की परंपरा बन गया है।
सुबह से ही महिलाओं में उत्साह का माहौल रहा। सोलह श्रृंगार में सजी महिलाओं ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर करवाचौथ कथा का श्रवण किया। दिनभर बिना जल पिए व्रत रखने के बाद महिलाओं ने शाम को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया और अपने पतियों के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत तोड़ा। मंदिरों, घरों और आंगनों में पूजा की गूंज और मंगल गीतों की ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
स्थानीय महिला रचना कुमारी, रानी देवी, सरिता देवी, सुमन देवी, रोशनी गुप्ता, पूनम देवी, कुमारी प्रियंका, संगीता देवी और चंदा कुमारी ने बताया कि करवाचौथ का व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और दीर्घायु का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस व्रत के माध्यम से पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास और अधिक गहरा होता है।
वहीं स्थानीय निवासी उमेश तिवारी ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, पांडवों पर आए संकट को दूर करने के लिए द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर करवाचौथ का व्रत रखा था, जिसके फलस्वरूप पांडवों की रक्षा हुई और उनकी शक्ति में वृद्धि हुई।
शाम ढलते ही आसमान में चांद की झलक पाकर महिलाओं ने मिट्टी के करवे में चावल, जौ और पानी रखकर चांद को अर्घ्य दिया। इसके बाद चलनी से चांद और पति का दर्शन कर आरती उतारी। पति-पत्नी ने एक-दूसरे की दीर्घायु और सुखमय जीवन की मंगल कामना की। पूरे अररिया जिले में करवाचौथ का यह त्योहार प्रेम, आस्था और समर्पण का सुंदर प्रतीक बन गया।























