अररिया व्यवहार न्यायालय ने सोमवार को चर्चित फुलकाहा एएसआई राजीव रंजन मल्ल हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 18 आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा दी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ रवि कुमार की अदालत ने अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए कहा कि यह अपराध न केवल एक पुलिस अधिकारी की हत्या है, बल्कि कानून-व्यवस्था और समाज पर गंभीर आघात है। इसलिए कठोर दंड देना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
अभियुक्तों के नाम और सजा का विवरण
न्यायालय ने जिन अभियुक्तों को दोषी करार दिया है, उनमें शामिल हैं –
- रुपेश कुमार यादव उर्फ रुपेश कुमार, पिता जयनारायण यादव
- मनीष प्रसाद यादव, पिता परमेश्वर यादव
- ओमप्रकाश यादव, पिता स्व. परमेश्वरी यादव
- गुड्डू यादव उर्फ गुड्डू कुमार, पिता राजेश यादव
- जयदेव कुमार यादव, पिता स्व. परमेश्वरी यादव
- रंजीत यादव, पिता गुलाब चन्द्र यादव
- मुकेश कुमार यादव उर्फ मुकेश कुमार, पिता जय नारायण यादव (सभी निवासी लक्ष्मीपुर, थाना फुलकाहा, अररिया)
- कुन्दन कुमार यादव, पिता उमेश यादव
- प्रमोद कुमार यादव, पिता स्व. उपेन्द्र यादव
- ललन कुमार यादव, पिता जयप्रकाश यादव
- अनमोल यादव उर्फ रौनक कुमार भारती, पिता उमेश यादव (सभी निवासी खैरा चन्दा, थाना नरपतगंज, अररिया)
- शंभू यादव, पिता लक्ष्मी यादव
- ललीत कुमार, पिता गणेश यादव
- मिथुन कुमार यादव, पिता चन्द्रकिशोर यादव
- गुड्डू कुमार यादव, पिता चन्द्रकिशोर यादव
- गौरव कुमार सिंह, पिता अशोक सिंह
- पंकज यादव, पिता गणेश यादव (सभी निवासी मिर्जापुर, थाना फुलकाहा, अररिया)
- प्रभु कुमार यादव, पिता प्रमोद यादव, निवासी केबला भिमपुर, थाना भिमपुर, सुपौल।

सभी को आजीवन सश्रम कारावास और ₹20,000-20,000 का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया गया है। यदि वे जुर्माना नहीं देते हैं तो उन्हें अतिरिक्त एक-एक वर्ष की सश्रम कारावास भुगतनी होगी।
अदालत की सख्ती
अदालत ने फैसले में कहा कि पुलिस बल की सुरक्षा और समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। एएसआई की निर्मम हत्या न केवल एक व्यक्ति के जीवन की क्षति है, बल्कि यह घटना पुलिस विभाग की कार्यक्षमता और सम्मान पर भी सीधा हमला है।![]()
परिजनों ने जताई संतुष्टि
फैसले के बाद मृतक एएसआई राजीव रंजन मल्ल के परिजनों ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि देर से ही सही, लेकिन न्याय मिला। वहीं, अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह फैसला भविष्य में अपराधियों के लिए नजीर बनेगा और समाज में कानून के प्रति विश्वास और मजबूत होगा।
यह फैसला अररिया जिले में न केवल कानून-व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है बल्कि यह भी संदेश देता है कि अपराध कितना भी बड़ा क्यों न हो, न्यायालय से कोई भी बच नहीं सकता।



















