नज़रिया न्यूज़ (रूबी बिनीत), अररिया।
वन संरक्षण, अनुसंधान के साथ साथ वन्य जीव विज्ञान की पहल में सक्रिय रूप से अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले युगपुरुष अररिया के लाल रिटायर आई.एफ.एस उपेन्द्र प्रसाद अब नही रहे.
उनके निधन पर परिजन सहित चाहने वालो मे शोक व्याप्त है.
इनका निधन 08 जुलाई 2025 को गाजियाबाद में हो गया था.
अंतिम संस्कार उनकी दूसरी पुत्री डॉ बिनीता प्रसाद व इंजीनियर राजेश कुमार के इकलौते पुत्र दिव्यांश श्रीवास्तव उर्फ चुनचुन ने किया.
जबकि श्राद्धकर्म इनके पैतृक शहर अररिया के चित्रगुप्त नगर वार्ड 21 स्थित पैतृक घर में किया गया.
सनातन धर्म के विधि विधान के अनुसार श्राद्धकर्म उनके बड़े भतीजा विकास प्रकाश पिता विनोद प्रसाद ने किया, जबकि सहयोगी के रूप में उनकी दूसरी पुत्री डॉ बिनीता प्रसाद व इंजीनियर राजेश कुमार के इकलौते पुत्र दिव्यांश श्रीवास्तव उर्फ चुनचुन ने बखूबी निभाया.
डॉ बिनीता प्रसाद व इंजीनियर राजेश कुमार के इकलौते पुत्र दिव्यांश श्रीवास्तव उर्फ चुनचुन ने मिलकर दरिंद्र नारायण महाभोज का भी आयोजन किया। वेलोग अपने परिजन वरीय अधिवक्ता विनोद प्रसाद के संग स्थानीय गोढ़ी चौक जाकर दरिद्र नारायण महाभोज को सफल बनाया.
इसके बाद अन्य विशेष पूजन कार्यक्रम के तहत श्री सत्यनारायण भगवान की पूजन अर्चना भी की गई. कार्य में डॉ बिनीता प्रसाद व इंजीनियर राजेश कुमार के इकलौते पुत्र दिव्यांश श्रीवास्तव उर्फ चुनचुन ने उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजन कर प्रार्थना की.
विशेष जानकारी देते हुए स्व उपेन्द्र प्रसाद के मझले भाई चित्रगुप्त नगर निवासी वरीय अधिवक्ता विनोद प्रसाद ने बताया कि वन विभाग से जुड़ने के बाद से ही लगातार स्व उपेन्द्र प्रसाद वन अनुसंधान व वन्य जीव विज्ञान की पहल में सक्रिय रूप से शामिल थे. जिसमें व्यावहारिक वानिकी पर ध्यान केंद्रित किया गया था. जैसे कि वर्तमान ऊर्जा आवश्यकताओं का समर्थन करने के लिए नीलगिरी वृक्षारोपण का मूल्यांकन करना. वह न केवल एक प्रशासक थे, बल्कि वानिकी विज्ञान में भी योगदानकर्ता थे.
उन्होंने क्षेत्र आधारित सिल्वीकल्चरल परीक्षणों का परीक्षण किया व भूगर्भीय वन प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया.
वरीय अधिवक्ता विनोद प्रसाद ने बताया कि स्व उपेन्द्र प्रसाद का जन्म जिला मुख्यालय अररिया के लब्ध प्रतिष्ठित अधिवक्ता सह पत्रकार स्व श्यामसुंदर प्रसाद के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में 10 जुलाई 1939 को बिहार के अररिया नगर में हुआ था.
उनका बचपन अररिया के सांस्कृतिक परिवेश में बीता. उनका निवास मीरा टॉकीज़ के समीप चित्रगुप्त नगर मे था.जहाँ से सिनेमा हाल में बजते गीतों की धुनें उनके बालमन में गूंजती रहती थीं.
उन्होंने अररिया हाई स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की और फिर आगे की शिक्षा हेतु इलाहाबाद स्थित इविंग क्रिश्चियन कॉलेज से इंटरमीडिएट (12वीं) उत्तीर्ण की. वहाँ उन्हें फोटोग्राफी में गहरी रुचि हुई. वे कॉलेज के फोटोग्राफी क्लब के सक्रिय सदस्य बने. पढ़ाई के बाद वे अररिया लौटे.
अररिया हाई स्कूल में अध्यापक के रूप में विज्ञान व गणित विषयों की कक्षाएँ 8वीं से 12वीं तक पढ़ाई जहाँ भी छात्रों की ज़रूरत होती. वे तत्पर रहते. उनके छात्रों में वर्तमान समय में खेल जगत से जुड़े सत्येंद्र नाथ शरण थे. रिश्ते में वे उपेन्द्र प्रसाद के चचा लगते थे. परन्तु उम्र में बड़े होने के कारण सत्येंद्र नाथ शरण उन्हें भैया ही कहते थे.
मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज से बीएससी की परिक्षा देकर स्व० भुवनेश्वर साह व डॉ कपिलेश्वर साह के साथ घर आए.
तीनों ने स्वेच्छा से हाईस्कूल अररिया में अस्थाई रूप में शिक्षक के रूप में कुछ दिनों के लिए पढ़ाने का काम किया.
उनके मित्र मंडलियों मे जिले के बहुचर्चित बीरेंद्र नाथ शरण उर्फ बिरेंन, धरमनाथ रॉय व राधेश्याम वर्मा साथी रहे.
उन्होंने अपने पिताजी स्वर्गीय श्यामसुंदर प्रसाद के साथ मिलकर अररिया में लक्ष्मी पुस्तक भंडार की स्थापना में योगदान दिया. जो शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी केंद्र बना. कालांतर में पारिवारिक बंटवारे मे लक्ष्मी पुस्तक भंडार का मालिकाना हक स्व उपेन्द्र प्रसाद के छोटे भाई गौरीशंकर प्रसाद को मिला.
उन्होंने एनडीए की परीक्षा पास की, पर विशेष परिस्थितियों में उसमें सम्मिलित नहीं हो सके। उन्होंने हार नहीं मानी. पटना सचिवालय में सहायक पद के लिए चयनित हुए और फिर बीपीएससी परीक्षा में सफल होकर वन सेवा में प्रविष्ट हुए.
1965-67 में उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय वन सेवा महाविद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त किया. 1968 में यूपीएससी द्वारा भारतीय वन सेवा (आई0 एफ0 एस0) में चयनित होकर उन्होंने गया, मुंगेर, चाईबासा आदि जिलों में डीएफओ तथा बाद में हजारीबाग व राँची में वन संरक्षक (कॉन्जर्वेटर) के रूप में सेवाएँ दीं.
अंततः वे मुख्य वन संरक्षक, बिहार (चीफ कॉन्जर्वेटरऑफ फारेस्ट) के पद पर पहुँचकर राँची मे अपना योगदान दिये थे.
वर्ष 1996 में जब वे बिहार के विश्व खाद्य कार्यक्रम के डायरेक्टर के पद पर आसीन थे. तभी उन्होंने बांग्लादेश में आयोजित विश्व खाद्य कार्यक्रम (वर्ल्ड फूड प्रोग्राम) में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर कई महत्वपूर्ण कार्य कर भारत को उच्चाइयो के शिखर पर पहुँचाने मे अपनी अहम भूमिका अदा किये थे.
सामाजिक वानिकी (सोशल फोरेस्ट्री) में भी उनका उल्लेखनीय कार्य रहा.
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने दिसंबर 1997 से जून 2021 तक पटना उच्च न्यायालय में एक अनुशासित, निष्ठावान व सिद्धांतप्रिय अधिवक्ता के रूप में सेवा दी. वे सेवा कानून, विद्युत बोर्ड और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (केट) से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ माने जाते थे.
वे जीवन भर सिद्धांतों पर अडिग रहे। अनुशासन, परिश्रम व सत्य के मार्ग को उन्होंने अपना धर्म माना, चाहे इसके लिए उन्हें कठिनाइयों का सामना ही क्यों न करना पड़ा हो. उनका सम्पूर्ण जीवन कर्तव्य, आदर्श व नैतिकता की जीवंत मिसाल है.
वरीय अधिवक्ता विनोद प्रसाद ने बताया कि उपेन्द्र प्रसाद जी हमारे परिवार के लिए सदैव प्रेरणा-स्रोत रहेंगे व उनका आदर्शमयी जीवन हमारे विचारों को दिशा देता रहेगा.
इनके निधन पर इनकी धर्मपत्नी विन्दू रानी, मझला भाई विनोद प्रसाद, छोटा भाई गौरीशंकर प्रसाद, छोटी भाभो तनुजा प्रसाद, बड़े दामाद बिमल कुमार सिन्हा, मझली पुत्री डॉ बिनीता प्रसाद उर्फ मिनी, मझले दामाद राजेश कुमार, छोटी पुत्री डॉ अनिता प्रसाद उर्फ डॉली, छोटे दामाद राहुल जयपुरियार, भतीजा क्रमशः विकास प्रकाश, बिनीत प्रकाश, विवेक प्रकाश, अभिषेक कुमार व अभिनीत कुमार, नाती क्रमशः शिखर, दिव्यांश, अक्षत, राघव व केशव सहित समस्त परिजन मर्माहत है.





















