नजरिया न्यूज़ । पूर्णियां । मलय कुमार झा
पूर्णियां जिले में लाखों रूपये के सरकारी फंड से बना शौचालय अंतिम सांस गिन रहा है। सरकारी योजना के नाम पर राशि का उठाव हो जाता है मगर रखरखाव नहीं होने से इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। शौचालय में पानी भले न हो सफाई हो या ना हो मगर शौचालय के नाम पर संवेदक और निगम दोनों मालामाल हो रहे हैं ये तो एकमात्र बानगी है शहर में कई जगहों पर बने शौचालय का यही हाल है। स्टेडियम के भीतर पोल पर लगे लाइट और उपकरण की चोरी हो रही है। यहां चौबीस घंटे सुरक्षा गार्ड मौजूद रहता है इसके बाद भी चोरी हो रही है। सुध लेने वाला कोई नहीं है। जनप्रतिनिधियों को फीता काटने और फोटो सेशन से फुर्सत नहीं है और जनता की सुनता कौन है। नतीजतन अंधेर नगरी चौपट राजा।
इंदिरा गांधी स्टेडियम में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत साल 2018 में भाजपा के विधायक निधि से दो सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया ताकि खिलाड़ियों को इसका लाभ मिले। साफ सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। शौचालय के भीतर गंदगी और प्लास्टिक का फेंका हुआ बोतल सरकारी उदासीनता को दर्शा रहा है। मेंटनेंस के अभाव में यह बेकार हो गया। शौचालय की दीवार पर स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का स्लोगन मोटे अक्षरों में लिखा गया है मगर भीतर की तस्वीर स्वच्छता अभियान की पोल खोल रहा है। शौचालय का दोनों दरवाजा खुला है भीतर नल की टोंटी सूखी है और गंदगी ऐसी जिसे आप देख भी नहीं सकते। कोई व्यक्ति इस शौचालय का इस्तेमाल नहीं करते हैं लिहाजा लोगों को यूरिनल के लिए स्टेडियम के
बाहर पेड़ की आड़ में जाना पड़ता है। पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। बाहर से पानी खरीद कर पीना पड़ता है। स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनने के बाद
आमलोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। लिहाजा गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अलावा यदा कदा किसी सरकारी स्तर के टूर्नामेंट होने पर ही स्टेडियम खुलता है। अन्य समय ताला लटका रहता है।
स्टेडियम के भीतर सिथेंटिक ट्रैक के चारों ओर स्टील का बार्डर लगाया गया था जिससे ट्रैक दोनों तरफ से सुरक्षित रहे। मगर चार सौ मीटर के इस ट्रैक का स्टील बार्डर गायब है। ट्रैक के पूरब दिशा में हैमर और डिस्कस थ्रो के लिए लगाए गया 10 केज पोल गायब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेडियम के आसपास स्मैकरों और नशेड़ियों का अड्डा है। इन लोगों का कहना है कि स्मैकर ही सामान की चोरी कर रहे हैं। पूर्णियां जिला एथलेटिक्स संघ के सदस्य मुस्सवर अहमद ने बताया कि साढ़े सात करोड़ की लागत से सिंथेटिक ट्रैक बना दिया गया मगर खिलाड़ियों को लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि स्टेडियम के भीतर जाने की मनाही है।
आमलोगों के प्रवेश पर पाबंदी है। खेलो इंडिया के तहत पूर्णियां विश्वविद्यालय
द्वारा स्टेडियम के भीतर सिथेंटिक ट्रैक का निर्माण कराया गया है।
लिहाजा युवा खिलाड़ी रंगभूमि के उबड़ खाबड़ और गड्ढे से भरे मैदान में प्रैक्टिस करते हैं। दौड़ने के दौरान खिलाड़ी चोटिल हो जाते हैं। जिला प्रशासन से लोग स्टेडियम खोलने की मांग कर रहे हैं।























