- कोसी-मेची अंतःराज्यीय लिंक परियोजना को मंत्रिपरिषद ने दी स्वीकृति
- परियोजना से सीमांचल क्षेत्र में करीब 2.15 लाख हेक्टेयर में नई सिंचाई सुविधा होगी सुनिश्चित
- अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार के लोग होंगे लाभान्वित
- 2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगी सुनिश्चित सिंचाई सुविधा
- बाढ़ के प्रबंधन में सहायक होगी परियोजना, मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य
वीरेंद्र चौहान, नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज, 24जून।
विधानसभा चुनाव 2025से पहले पूर्णिया प्रमंडल क्षेत्र को एक बड़ी परियोजना मिली है। यह परियोजना 2025तक पूर्ण हो जाएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में यह कार्य संभव हुआ है। महत्वाकांक्षी परियोजना कोसी-मेची अंतःराज्यीय लिंक परियोजना को मंत्रिपरिषद् से स्वीकृति मिल गई है। कोसी-मेची लिंक परियोजना के कार्यान्वयन से 2 लाख 14 हजार 813 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इनमें अररिया जिले के 69,642 हेक्टेयर, पूर्णिया जिले के 69,970 हेक्टेयर, किशनगंज जिले के 39,548 हेक्टेयर और कटिहार जिले के 35,653 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल हैं।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना से अररिया जिले के फारबिसगंज, कुर्साकांटा, सिकटी, पलासी, जोकीहाट और अररिया प्रखंड; पूर्णिया जिले के बैसा, अमौर और बायसी; किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ, दिघलबैंक, बहादुरगंज और कोचाधामन प्रखंड; कटिहार जिले के कदवा, डंडखोड़ा, प्राणपुर, मनिहारी और अमदाबाद प्रखंडों के किसान लाभान्वित होंगे।
उल्लेखनीय है कि कोसी नदी के पानी के साथ अत्यधिक मात्रा में सिल्ट का प्रवाह होता है, जिससे वर्तमान में पूर्वी कोशी मुख्य नहर प्रणालियों में भी गाद भर जाता है।
इस परियोजना के तहत मुख्य नहर के किमी 1.15 किमी से 2.66 किमी तक (लम्बाई 1.51 किमी) में पूर्व से निर्मित सेटलिंग बेसीन का आधुनिकीकरण का प्रावधान है, जिससे इस नहर प्रणाली में सिल्ट की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकेगा।
किशनगंज, बिहार प्रदेश में पूर्णिया प्रमंडलीय क्षेत्र की स्थिति -फाइल फोटो
सीमांचल क्षेत्र के लाखों किसानों और आम लोगों के लिए अहम है परियोजना
कोसी-मेची अंत:राज्यीय नदी जोड़ परियोजना के माध्यम से कोसी नदी के अधिशेष जल को महानंदा बेसिन में पहुंचाकर, जहां चार जिलों के बड़े क्षेत्र में सिंचाई सुविधा पहुंचाई जाएगी, वहीं कोसी नदी की बाढ़ का प्रभाव भी कम होगा। योजना के तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर के 0.00 किमी से 41.30 किमी तक वर्तमान जल संवहन क्षमता को 15 हजार क्यूसेक्स से बढ़ा कर 20 हजार क्यूसेक्स किया जाएगा, जबकि मुख्य नहर का इसके अंतिम बिंदु यानी 41.30 किमी से 117.50 किमी तक विस्तार किया जाएगा। साथ ही कुल 4 शाखा नहर (लंबाई 229.00 किमी) और 6 वितरणी (लंबाई 48.00 किमी) के साथ 5 क्यूसेक तक की नहर प्रणालियों का निर्माण कराया जाएगा। नहर के अंतिम छोर (किशनगंज जिले के माखनपुर गांव) पर 950 क्यूसेक्स जलस्राव प्रवाहित होगा, जो मेची नदी में मिलेगा।
इस कोसी-मेची परियोजना की अनुमानित कुल लागत राशि 6,282.32 करोड़ रुपये है। इस योजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना – त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) में शामिल कर केंद्र सरकार इसके लिए बिहार को 60 प्रतिशत यानी 3,652.56 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।























