नजरिया न्यूज, अररिया।
जिले के शिवपुरी, वार्ड नं-9 निवासी प्रेम प्रकाश दास के साथ एटीएम धोखाधड़ी की बड़ी वारदात सामने आई है। घटना 25 मई की सुबह करीब 7:25 बजे की है, जब पीड़ित अपनी पत्नी कविता कुमारी के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए पंजाब नेशनल बैंक, शाखा अररिया के सामने स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एटीएम में पहुंचे।
प्रेम प्रकाश दास ने बताया कि कार्ड एटीएम मशीन में फंस गया और मशीन पर कोई निर्देश नहीं आ रहा था। इसी दौरान दो अज्ञात व्यक्ति एटीएम में पहुंचे। उन्होंने खुद को बैंककर्मी के परिचित बताया और मोबाइल पर एक कथित ‘रविरंजन’ नामक व्यक्ति से बात कराई जिसने खुद को एसबीआई कर्मचारी बताया। रविरंजन ने प्रेम प्रकाश को निर्देश दिया कि इंटर दबाएं, पिन डालें और कैंसिल बटन को दबाकर रखें। इसी बीच रविरंजन ने यह भी कहा कि वह सीसीटीवी में उन्हें देख रहा है और बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम में जाकर वहां मौजूद गार्ड प्रमोद को लाएं।
प्रेम प्रकाश उनकी बातों में आकर गार्ड को बुलाने के लिए चले गए, लेकिन जब 5-7 मिनट बाद वापस लौटे, तो न तो उनका एटीएम कार्ड मशीन में था और न ही वे दोनों व्यक्ति। उन्हें तब समझ आया कि उनके साथ धोखा हो चुका है।
घर पहुंचते ही उन्होंने खाते की जांच की तो पाया कि 7:54 बजे IDBI के एटीएम से ₹10,000 और उसके बाद ₹1,500 की निकासी कर ली गई है। कुल ₹11,500 की धोखाधड़ी हो चुकी थी।
पीड़ित ने बताया कि उसी दिन उन्हें डॉक्टर को दिखाने पूर्णिया जाना था, इसलिए वे 25 और 26 मई को अररिया नहीं रह पाए। 27 मई को उन्होंने नगर थाना अररिया में आवेदन देने की कोशिश की लेकिन थाना ने आवेदन नहीं लिया। इसके बाद साइबर थाना अररिया में आवेदन दिया गया, लेकिन दो दिन तक आवेदन रखने के बाद उन्होंने यह कहते हुए वापस कर दिया कि मामला उनके थाना क्षेत्र में नहीं आता और पीड़ित को सदर थाना में आवेदन देने को कहा।
अब पीड़ित यह सवाल कर रहे हैं कि जब एक व्यक्ति के साथ खुलेआम बैंक एटीएम में धोखाधड़ी होती है और उसका पैसा निकल जाता है, तो आखिर वह न्याय के लिए कहां जाए? एक थाना से दूसरे थाना भेजा जाना और आवेदन लेने से इनकार करना न्याय की राह में बड़ी बाधा है।
प्रेम प्रकाश दास ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि उन्हें समय पर इंसाफ मिल सके और ऐसे गिरोह पर शिकंजा कसा जा सके जो भोले-भाले लोगों को निशाना बना रहे हैं।
जब नजरिया न्यूज की टीम इस मामले को लेकर डीएसपी साइबर से संपर्क करना चाहा तो उनका फ़ोन नही उठा।
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने साइबर अपराध से संबंधित इस मामले में मार्गदर्शन या कार्रवाई मिल सके, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ने जब मीडिया का भी कॉल रिसीव नहीं किया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आम नागरिक को जब ठगी का शिकार बनाया जाता है और वो न्याय पाने की कोशिश करता है, तब जिम्मेदार अफसरों द्वारा इस तरह की उपेक्षा क्या न्याय व्यवस्था की कमजोरी को नहीं दर्शाती?
थाना पुलिस द्वारा आवेदन न लेना, साइबर थाना द्वारा जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना और डीएसपी साइबर द्वारा फोन कॉल तक रिसीव न करना – यह सब इस बात को दर्शाता है कि एक आम नागरिक के लिए न्याय की राह कितनी कठिन और निराशाजनक हो गई है।
इस पूरे मामले में पीड़ित ने जिला प्रशासन और वरीय पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच हो तथा दोषियों को चिन्हित कर शीघ्र गिरफ्तारी की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसे मामलों में पीड़ित को एक से दूसरी जगह न दौड़ना पड़े, और उन्हें समय पर न्याय व सहायता मिल सके।























