नजरिया न्यूज़ डिजिटल पटना। पटना के मोईनुल हक स्टेडियम में आयोजित रंधीर वर्मा अंडर 19 सेमीफाइनल मैच में अररिया की टीम ने एक कुरी तरह के प्रदर्शन के चलते 142 रनों से हार का सामना किया। बिहार क्रिकेट संध द्वारा आयोजित इस खेल में अररिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया था, लेकिन मैदान पर उनके खेल की बीमार अवस्था स्पष्ट दिखाई दी।
पटना की टीम ने जब बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाली, तो उनके बल्लेबाजों ने पूरे आक्रमण में दमदार प्रदर्शन पेश करते हुए 46.4 ओवर में जोरदार स्कोर 346 रन बनाए। हालांकि इस सफर के दौरान पटना को कई महत्वपूर्ण विकेट गंवाने पड़े, परंतु यश प्रताप के 130 रन, सौरभ तिवारी के 49 और विकास कृष्णा के 43 रन के प्रदर्शन ने मैच की धारा को साफ कर दिया। इस दौरान अररिया की गेंदबाजी में गंभीर चूकें सामने आईं। शिवम कुमार, अक्षय विश्वास, अमन राज, और उज्जवल कुमार द्वारा लिए गए कुछ विकेटों के बावजूद, गेंदबाजों की समय पर उकसाने और दबाव बनाने की असमर्थता मैच के परिणाम पर भारी पड़ गई।
जब पटना ने बल्लेबाजी खत्म की और लक्ष्य निर्धारित किया गया, तो अररिया की टीम ने अपनी पिछली शंकाओं को दोहराते हुए लाचार प्रदर्शन किया। 39 ओवर में 10 विकेट पर केवल 203 रन बना पाने वाला आंकड़ा अररिया की आक्रामक सोच और आत्मविश्वास की भारी कमी को दर्शाता है। टीम में बल्लेबाजी के क्रम में समन्वय की कमी स्पष्ट रूप से दिखी। अमन राज के 53 रन, शिवम के 31, अक्षय और आदर्श की 30-30 रन की जोड़ियों और तनमय व पंकज के निम्न स्कोर ने यह संकेत दिया कि टीम ने स्थिति का सही ढंग से सामना नहीं किया।
अररिया की इस निराशाजनक हार से न केवल खिलाड़ियों का मनोबल गिरा है, बल्कि प्रशंसकों में भी विषाद की लहर दौड़ गई है। खेल के दौरान टीम के कप्तान द्वारा लिए गए निर्णय और रणनीतिक चूकों पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी टीम की आक्रामक बल्लेबाजी के सामने अररिया की रणनीति असंगत प्रतीत हुई, जिसके कारण उन्हें रन बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि अररिया की टीम के पास प्रतिभा के अक्षांश जरूर हैं, लेकिन गंभीर प्रबंधन की कमी और टीम वर्क में दरार ने मैच के परिणाम को करारा बना दिया। इस हार ने आगामी मुकाबलों के लिए अररिया की तैयारी और मनोबल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह साफ है कि अब उन्हें अपने खेल की बुनियादी कमजोरियों पर कड़ी मेहनत के साथ ध्यान देना होगा।
यह मैच न केवल अररिया की टीम के लिए बल्कि उनके प्रबंधकीय ढांचे के लिए भी चेतावनी का संदेश देता है कि खेल के हर पहलू पर संतुलन और जिम्मेदारी जरूरी है, वरना लगातार हार से स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।