प्रतिभा सिंह, संवाददाता नजरिया न्यूज, 19अप्रैल।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार ने बीआईआरएसी के साथ मिलकर 17 अप्रैल, 2025 को बायोफाउंड्री अर्थात स्वचालित उपकरणों एवं प्रौद्योगिकियों से सुसज्जित
और बायोमैन्युफैक्चरिंग पहल श्रृंखला में 12वां वेबिनार आयोजित किया ।
वेबिनार में जैव प्रौद्योगिकी विभाग में वैज्ञानिक ‘डी’ डॉ. कामाक्षी चैत्री ने विषयगत क्षेत्र का अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण समय पर प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, कैंसर और दुर्लभ बीमारियों सहित कई जानलेवा बीमारियों के लिए संभावित उपचारात्मक परिणाम प्रदान करने में इन उपचारों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह क्षेत्र वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह से मौजूद है और सेल और जीन थेरेपी उत्पाद विकास श्रृंखला में चुनौतियों का समाधान करने के लिए उन्होंने एक केंद्रित और समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आगे डीबीटी द्वारा बायोई3 नीति के तहत उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला, ताकि नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके और स्वदेशी सेल और जीन थेरेपी के विकास के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र को सुविधाजनक बनाया जा सके।
सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी, नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. देबोज्योति चक्रवर्ती ने सिकल सेल रोग, नेत्र रोग आदि जैसी विभिन्न बीमारियों के लिए विकास के तहत जीन संपादन तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने इन उपचारों की खोज से लेकर व्यावसायीकरण तक के मार्ग में विनिर्माण और विनियामक बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता और किफायती तथा सुलभ उपचारों के विकास में विचार किए जाने वाले मुद्दों पर प्रकाश डाला।

नई दिल्ली -जैव प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार ने बीआईआरएसी के साथ मिलकर 17 अप्रैल, 2025 को बायोफाउंड्री अर्थात स्वचालित उपकरणों एवं प्रौद्योगिकियों से सुसज्जितऔर बायो मैन्युफैक्चरिंग पहल श्रृंखला में 12वां वेबिनार आयोजित किया …
= फोटो, मार्च 2025जैव प्रौद्योगिकी को लेकर हुई बैठक
इम्यूनील थेरेप्यूटिक्स के क्लीनिकल डेवलपमेंट के प्रमुख डॉ. अनिल कामत ने सेल और जीन थेरेपी के स्थानीय और वैश्विक परिदृश्य पर बात की और इम्यूनील थेरेप्यूटिक्स द्वारा बीआईआरएसी समर्थित सीएआर-टी सेल थेरेपी की व्यावसायिक स्वीकृति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने सेल और जीन थेरेपी के पैमाने और विनिर्माण में विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने इन उपचारों की बेहतर पहुंच, उपलब्धता और सामर्थ्य के लिए आगे का रास्ता सुझाया।
सत्र का समापन डीबीटी और बीआईआरएसी अधिकारियों द्वारा संचालित एक प्रश्नोत्तर खंड के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की। सेल और जीन थेरेपी के लिए उन्होंने बायो मैन्युफैक्चरिंग में चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की और नियामक आवश्यकताओं को संबोधित किया।
शुभारंभ में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) में वरिष्ठ सलाहकार/वैज्ञानिक ‘एच’ डॉ. अलका शर्मा ने सतत हरित विकास का समर्थन करके उच्च प्रदर्शन वाले जैव विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बायोई3 नीति के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने संक्षेप में बताया कि उच्च प्रदर्शन वाले जैव विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मौदी द्वारा बायोई3 नीति को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने कहा कि आज के वेबिनार में वर्तमान परिदृश्य, उभरते अवसरों, चुनौतियों और रणनीतिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया जाएगा जो देश में इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं।




















