
नजरिया न्यूज अररिया/नई दिल्ली।
बंगाल में वक्फ कानून के विरोध की आड़ में भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री प्रकाश कुमार ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र लिखकर राज्य की भयावह स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि हिंसा सुनियोजित थी और इसका असली उद्देश्य मुर्शिदाबाद को हिंदू विहीन बनाना था।
पत्र में बताया गया कि 11 अप्रैल को मुस्लिम भीड़ ने वक्फ कानून के विरोध के नाम पर हिंसक प्रदर्शन किया, जिसमें हिंदुओं के 200 से अधिक घर व दुकानों को जलाया गया, सैकड़ों लोग घायल हुए और तीन की हत्या कर दी गई। महिलाओं के साथ गंभीर अपराध हुए और 500 से अधिक परिवारों को पलायन पर मजबूर होना पड़ा।
सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल
प्रकाश कुमार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दंगाइयों के साथ खड़ी नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीड़ितों से मिलने की बजाय उन इमामों से मुलाकात की जो हिंसा के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। यहां तक कि एक इमाम ने ममता को धमकी तक दी थी कि यदि उनका समर्थन नहीं मिला तो वे ‘औकात बता देंगे’।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी संकट
पत्र में यह भी कहा गया है कि बंगाल में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की आवाजाही बढ़ रही है, जिनके लिए पहचान पत्र और आधार कार्ड तक बनाए जा रहे हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश के आतंकी संगठनों की सक्रियता भी बढ़ रही है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है।
हिंदुओं के अस्तित्व पर संकट
पत्र में दावा किया गया कि अब बंगाल में हिंदू होना अपराध बनता जा रहा है। उनके त्योहारों पर पाबंदी है और सुरक्षा बलों तक को निशाना बनाया जा रहा है। पूरी व्यवस्था तृणमूल कांग्रेस के जिहादी तत्वों के इशारे पर चल रही है।
प्रमुख मांगें
प्रकाश कुमार ने राष्ट्रपति से मांग की है कि:
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बंगाल में अविलंब राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।
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हिंसा की जांच एनआईए से करवाई जाए।
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कानून व्यवस्था केंद्रीय बलों को सौंपी जाए।
घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से निष्कासित किया जाए और भारत-बांग्लादेश सीमा पर तारबंदी शुरू की जाए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की अखंडता और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए केंद्र को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।























