अररिया, 07 अप्रैल 2025। जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने रोग नियंत्रण को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में जिला पदाधिकारी श्री अनिल कुमार की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की बैठक समाहरणालय स्थित आत्मन सभागार में आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, पशुपालन, जीविका, आईसीडीएस, जिला परिवहन विभाग सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को एईएस व जेई के संभावित खतरे को लेकर सतर्कता बरतने और सभी स्तरों पर प्रभावी रोग नियंत्रण उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में इन बीमारियों का फैलाव बढ़ने की आशंका रहती है, ऐसे में सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें और समय रहते एहतियाती कदम उठाएं।
उन्होंने शिक्षा विभाग को स्कूलों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने, पशुपालन विभाग को सुअर पालन वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने तथा नगर निकाय व पंचायती राज विभाग को साफ-सफाई और जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए विशेष तैयारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रोग नियंत्रण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने बैठक में बताया कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में एईएस व जेई रोगियों के लिए दो बेड आरक्षित किए गए हैं, जबकि सदर अस्पताल में 10 बेड और फारबिसगंज अनुमंडल अस्पताल में 5 बेड वाला विशेष वार्ड संचालित किया जा रहा है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों को एईएस इमरजेंसी ड्रग किट और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। साथ ही, गंभीर मामलों के लिए नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध है।
सिविल सर्जन डॉ. के. के. कश्यप ने जानकारी दी कि यह रोग विशेष रूप से 01 से 15 वर्ष तक के बच्चों को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि कुपोषित बच्चे, भूखे पेट सोने वाले, तेज धूप में खेलने वाले या कच्ची लीची खाने वाले बच्चों में इस रोग का खतरा अधिक होता है। रोग के सामान्य लक्षणों में बेहोशी, शरीर में चमकी, अंगों में थरथराहट, और मानसिक असंतुलन शामिल हैं। उन्होंने अपील की कि ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल में जांच और इलाज करवाएं।
जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे यह समन्वित प्रयास जिला को एईएस व जेई जैसे खतरनाक रोगों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।























