पियूष रंजन सिंह, नजरिया न्यूज विशेष संवाददाता, 04फरवरी।
भारत जोड़ो न्याय यात्रा दांडी यात्रा की याद ताजा कर दी है।
दांडी यात्रा यानि नमक सत्याग्रह की शुरुआत 12 मार्च 1930 को हुई थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में 24 दिन का यह अहिंसा मार्च 6 अप्रैल को दांडी पहुंचा और अंग्रेजों का बनाया नमक कानून तोड़ा। 2. उस वक्त देश पर अंग्रेजों का राज था और किसी भी भारतीय के नमक इकट्ठा करने या बेचने पर रोक थी। वहीं राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा लोकसभा चुनाव 2024को लेकर शुरू की गई है। इस यात्रा में राहुल गांधी का मुख्य नारा है:डरो मत। नफ़रत की बाजार में मोहब्बत की दुकान की स्थापना है। सामाजिक न्याय है।
पूर्वोत्तर भारत के सभी सातों राज्यों सहित पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में जनता को राहुल गांधी संबोधित कर चुके हैं। 03फरवरी को राहुल गांधी ने झारखंड के पाकुड़ में जनसभा को सम्बोधित करते हुए भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार किया। अन्यान्य की मुखालफत की। देश का धन किसे दिया जा रहा है, इस पर अपना विचार रखा। जिसकी
सोशल मीडिया में दिन भर चर्चा होती रही:
सोशल मीडिया के पत्रकारों के अनुसार:झारखंड में मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने में विलंब का भी इंडिया गठबंधन को लाभ मिला है।
सोशल मीडिया में 2014के लोकसभा चुनाव में माहौल भाजपा के पक्ष में था। वहीं माहौल 2024 में इंडिया गठबंधन के पक्ष में बनता दिख रहा है। ऐसा ही माहौल रहा तो विपक्ष का संपूर्ण वोट भाजपा के संपूर्ण के बीच लड़ाई सुनिश्चित हो जाएगी।
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भाजपा के सहयोग से फिर सरकार बनाने का प्रकरण, झारखंड में हेमंत सोरेन त्याग पत्र प्रकरण, चंडीगढ़ मेयर चुनाव में पीठासीन पदाधिकारी का बेईमानी प्रकरण, लोकसभा में जंप लगाने वाले युवकों का कोर्ट में बयान प्रकरण, असम में राहुल गांधी को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं देने का प्रकरण तथा युवाओं को सेना की जगह अग्निवीर में भर्ती से नाराज़गी प्रकरण को इंडिया गठबंधन के पक्ष में सोशल मीडिया देख रहा है।
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झारखंड में पहुंची राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा -ईडी की कार्रवाई ने बनाया यात्रा के पक्ष में माहौल:
राहुल गांधी तीन फरवरी को पाकुड़ में जनसभा को संबोधित किया। उनकी न्याय यात्रा आठ दिन झारखंड में रहेगी। जनसभा में जो माहौल दिखा और बना, उसका बड़ा कारण झारखंड में पहुंचने के पहले का सियासी को दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि ईडी के पदाधिकारियों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित जमीन प्रकरण में गिरफतार कर लिया है। इससे पहले झारखंड में ईडी के पदाधिकारियों पर एससीएसटी ऐक्ट के तहत झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। झारखंड में चंपई सोरेन को विधायकों ने विधायक दल का नेता चुना।
बीबीसी ने लिखा: चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुना गया है।वे सादगी से जीवन जीते रहे हैं।किसी को दिक़्क़त हुई, तो वे उन्हें टैग कर सोशल मीडिया पोस्ट किया। फिर चंद मिनटों में उसका समाधान। ये सब करते रहते हैं चंपई सोरेन।अब वे झारखंड के नए मुख्यमंत्री गए। हेमंत सोरेन के त्यागपत्र देने और सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने में विलंब से लिया गया निर्णय इंडिया गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाया।
उल्लेखनीय है कि हेमंत सोरेन से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ को लेकर ये संकेत मिलने लगे थे कि वो पद छोड़ सकते हैं।
सोशल मीडिया पर लाइव मनीष आनंद ने कहा: सरजू राय भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं। उनका मानना है हेमंत सोरेन भाजपा से अच्छी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा:भाजपा के स्थानीय सांसद और विधायकों का मानना हैं कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी छापेमारी करके हीरो बना रही है। 2019के विधानसभा चुनाव का एक भी वादा हेमंत सोरेन पूरा नहीं किया हैं। जनता उनसे संतुष्ट नहीं हैं।
अभिषेक कुमार : सरजू राय की राय महत्वपूर्ण है। वे लालू यादव और नीतीश कुमार के भी मित्र हैं। लालू यादव जो आज झेल रहे हैं, उसका पहला पेटिशन लालू राय ने तैयार किया था। फिर भी वे लालू यादव के दोस्त हैं।
सोशल मीडिया पर चल रही बहस:
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमेंत सोरेन को ईडी का नोटिस मिला था। उससे पहले असम के हेमंता विश्वशर्मा को ईडी का नोटिस मिला था । ईडी की नोटिस के बाद असम के हेमंत भाजपा में चले गए। आज वे असम के मुख्यमंत्री हैं। फिलहाल झारखंड के हेमंत भाजपा में नहीं गए। मुख्यमंत्री का पद छोड़ दिया। अब इसका लाभ इंडिया गठबंधन उठाता दिख रहा है।























