नजरिया न्यूज भागलपुर।
भागलपुर के जदयू सांसद अजय मंडल की गुंडई बुधवार को हवाई अड्डे पर दिखी। अपने समर्थकों के साथ मिलकर दो पत्रकारों को लात-घूसों से जमकर पीटा। साथ ही. दोनों का मोबाइल भी छीन लिया। सरेआम गालियां दी। यह सब वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के सामने हुआ। पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आने की सूचना पर सोशल मीडिया के दो पत्रकार कुणाल शेखर, सुमित कुमार समेत कई पत्रकार हवाई अड्डा पहुंचे थे। इसी दौरान सांसद अजय मंडल वहां पहुंचे और गाड़ी से उतरकर कुणाल शेखर, सुमित कुमार के बारे में कहा कि फोटो खींचता है रे…. यही सब करेगा रे.. फोटो खीचेगा? फोटो…. फोटो रे। यह फोटो फोटो बोलने के साथ ही अपशब्द कहते रहे और लात-घूसों से दोनों पत्रकारों को मारते रहे। दोनों के पेट व सीने पर चढ़कर सांसद व उनके समर्थकों ने पीटा। यह घटना जब वायरल हुई तो सांसद ने सफेद झूठ कहा कि वे नहीं जानते थे कि वे दोनों पत्रकार हैं।
फ़ोटो परिचय : पत्रकार पर थप्पड़ चलाते जदयू सांसद अजय मंडल।
इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए डिजिटल प्रेस क्लब बिहार ने कड़ी निंदा व्यक्त की है और प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और बिहार सरकार नीतीश कुमार से ऐसे भ्रष्ट नेता को पद से निलंबित कर प्राथमिकी दर्ज करते हुए उचित न्याय संगत करवाई की जाए। 
फोटो परिचय : पत्रकार को लात से मारते सांसद के पीए संदीप मिश्रा।
- अजय मंडल ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि वे मीडियाकर्मी थे। सच यह है कि वीडियों से स्पष्ट है कि उन्हें यह पता था। वे खुद लगातार गाली देते हुए कह रहे हैं- फोटो खींचेगा रे? फोटो?
- सांसद ने कहा कि उनकी गाड़ी को ठक-ठक किया। फिर उनके गार्ड से बहस हुई। सच यह है कि गाड़ी रुकते हुए उनका पीए संदीप मिश्रा और वे उतरे और गाली-गलौज व मारपीट करने लगे।
- कहा कि गार्ड ने हल्का सा धकेला तो लोग उलझ गए और गार्ड के साथ हाथापाई शुरू कर दी। किसी भी वीडियो में इसका कोई सबूत नहीं सांसद के लोग ही मारपीट करते हुए दिख रहे हैं।
- गाली-गलौज करते हुए सांसद फोटो लेने पर ही आपत्ति कर रहे थे। बाद में कहा, दोनों तरफ से गाली-गलौज हो रहा था। मैं तो अपने बॉडीगार्ड को गाली दे रहा था और अंदर चलने को कह रहा था।
- सांसद ने कहा कि वे अपने गार्ड को ही कह रहे थे कि, मैं काम में जा रहा हूं और तुमलोग ये सब कर रहे हो? जबकि वीडियो में सांसद सिर्फ मारपीट करते और गालीगलौज करते दिख रहे हैं।
एक सवाल जनता से भी ….
क्या आप किसी शिक्षक, डॉक्टर ऑफिसर, पत्रकार या कोई अन्य पेशे से जुड़े व्यक्ति को पीटे जाने पर खुश होते हैं क्या आप मान लेते हैं कि सब के सब चोर और बेईमान है तो अपनी सोच बदलिए।
यह सोचिए कि आपके बच्चे को या आपको इन्हीं शिक्षकों ने पढ़ाया है,
आप बीमार पड़ते हैं तो इन्हीं डॉक्टर में से किसी ने आपका इलाज किया है। आपके लिए आवाज इन्हीं पत्रकारों ने उठाया। आपका काम इन्हीं अफसर में से किसी ने किया होगा
कहने का मतलब यह है कि गलत हर पेशे में जुड़े लोग हो सकते हैं।
लेकिन सबको गलत मानकर उसकी पिटाई पर खुश होना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। अपने आप से पूछिए की क्या सब लोग बुरे हैं अगर बुरे हैं तो दुनिया चल कैसे रही है इसलिए गलत हो रहा है तो उसका विरोध करिए उसके साथ खड़ा होइए, ताली पीटीएगा तो नुकसान आपका भी होगा।























