दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज,1 9 नवंबर।
किशनगंज शहरी क्षेत्र की उत्पाद पुलिस नींद में ही रहती है। इसीलिए पश्चिम बंगाल सटा होने के चलते दोनों एड़ियां सटाकर और कंधा उचकाकर सैल्यूट करने वाले उत्पाद विभाग को मिल ही जाते हैं। ऐसा शिकायत राजधानी पटना पहुंचती रहती है। सिविल पुलिस भी छापेमारी करती रहती है।
सूत्र कहते हैं,ऐसे वफादार शुभचिंतकों के कहने पर शराब नहीं बेंचने वालों दुकानदारों पर पुलिस विभाग की फौज पहुंच जाती है। बेइज्जत करती है। फिर आने के लिए कहकर खाली हाथ अपनी अगली ड्यूटी बजाने लौट जाती है।
उत्पाद विभाग की ऐसी ही झूठी सावधानी से शरीफ दुकानदारों को शर्मशार होना पड़ता है। फिलहाल शराब बेंचने वालों चांदी काट रही हैं। कहा जाता है कि नगर परिषद किशनगंज से सटा हुआ ग्राम पंचायत टेउसा है। और इस पंचायत से सटा हुआ पश्चिम बंगाल का इलाका है। पश्चिम बंगाल में शराब की लाइसेंसी दुकानें हैं।
ग्राम पंचायत टेउसा के कुछ घरों में उत्पाद विभाग के पक्के चेले पश्चिम बंगाल से शराब लाकर किशनगंज शहरी क्षेत्र में एक काल पर मुहैया करा रहे हैं। ऐसे लोगों को अधिकांश शराब बेंचने जानते हैं।
उत्पाद विभाग की असफलता या सफलता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लोगों के खिलाफ मनमाने ढंग से कार्रवाई में उत्पाद विभाग लगा रहता हैं। शरीफ लोग भी ऐसी कार्रवाई की चपेट में आते रहते हैं।आक्रोशित लोगों ने यह आरोप लगाते हुए कहा की विभाग के द्वारा निर्दोष लोगों को पकड़कर उसे शराब तस्करी के आरोप में फंसाया जाता है।बीते 6 सालों से शराबबंदी कानून लागू है। सरकार और पुलिस प्रशासन शराबबंदी कानून को और सफल बनाने के लिए प्रयास कर रही है। लेकिन किशनगंज मद्य निषेद्य और उत्पाद विभाग के अधिकारी
असफल हैं।
मनमानी कार्रवाई की सीमा पार हो चुकी है:
लोगों ने कहा कि पानी सिर के ऊपर बहने से मद्य निषेद्य विभाग के कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा किया हुआ था। प्रशासन के खिलाफ भी नारेबाजी हुई थी।
फिलहाल शराब की बिक्री जारी है। शरीफ लोगों का उत्पीड़न जारी है। शराब की बरामदगी भी जारी है।























