नज़रिया न्यूज़ औरंगाबाद।
आपको बता दु की बिहार के औरंगाबाद में स्थित भगवान भाष्कर की नगरी देव में छठ पर्व करने का एक अलग ही महत्व है , क्यो की देव में स्थित भगवान भष्कर की मन्दिर तथा कुष्ट निवारण तालाब जो त्रेतायुग में भगवान राम के वंसज के आदेशाअनुसार भगवान विश्वकर्मा के द्वारा निर्माण कराया गय था, इस मंदिर के मुख्य पुजारी सुबाष मिश्रा से जब बात किया गया तो उन्होंने बताया कि देव नगरी में स्थापित भगवान भाष्कर की मंदिर तथा कुष्ट निवारण तालाब जो त्रेतायुग में निर्माण कराया गया था , जो विश्व मे अदुतीय है, उन्होंने यह भी बताया कि देव सूर्य मंदिर ही एक ऐसा सूर्य मंदिर है जिसका मुख्य दरवाजा पश्चिमामुख है , उन्होंने इसके पीछे का इतिहास बताते हुए कहा है कि मुगलो की शासन काल मे बहुत सारे मन्दिरो को तोड़ दिया गया था और उसपर मस्जिद बनवा दिया गया था उसी दौरान औरंजेब के द्वारा देव मन्दिर को भी तोड़ देने का आदेश दे दिया गया था जिस आदेश के उपरांत कुछ भाग को तोड भी दिया गया था लेकिन मंदिर तोड़ने की खबर सुनते ही आसपास के गांव से हजारों की संख्या में लोग उपस्थित होकर मन्दिर नही तोड़ने का आग्रह की जिसके उपरांत मुगल शासक ने फरमान जारी किया था कि हम इस शर्त पर मंदिर को नही तोड़ेगे अगर सूर्ययोदय से पहले इसका दरवाजा पश्चिम मुख का हो जायेगा , उसी रात्रि में इस मंदिर का दरवाजा पश्चिममुख हो गया था ,उन्होंने यह भी बताया कि भगवान भाष्कर का 11 स्वरूप की मूर्ति विरजमान है , जिन्हें ब्रम्हा विष्णु महेश के त्रिकाल रूप मन जाता है जो आदित्य पुराण बावन पुराण में वर्णित है उन्होंने यह भी बताया कि देव सूर्य मंदिर का वर्णन अन्य कई पुराणों में भी वर्णित है।
वही उन्होंने यह भी कहा है कि त्रेता काल मे भगवान राम के वंशज राजा इला के पुत्र अइल के द्वारा इस मंदिर तथा कुष्ट निवारण तालाब का निर्माण कराया गया था सवर प्रथम भगवान राम और माता सीता भी छ्ठी मइया का उपासना यहाँ की थी , उन्होंने यह भी कहा है कि , जो भी भक्त सचे दिल से मन्नत मांगते है , उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है ,इस दरवार से आज तक कोई भी खाली नही लौटा है,
इसके उपरांत कहा कि अगर कुष्ट रोग से पीड़ित मरीज इस कुष्ट निवार्ण तालाब में स्नान कर भगवान भाष्कर का अगर दर्शन करता है ,तो उसके कुष्ट रोग जैसे असाध्य बीमारी भी ठीक हो जाएगी है ,हालांकि कुछ दिन पूरब भगवान भष्कर की धरती पर वेदों के ज्ञाता रामभद्राचार्य का भी आगमन हुआ था और उन्होंने भी अपने प्रवचन में कहा था कि भगवान राम के द्वारा भी इस मंदिर का ज्वनोधार कई बार कराया गया था , जो वेदों में वर्णित है, इन सारी बातों को लेकर भगवान भष्कर के नगरी देव में छठ महा पर्व करने का कुछ अलग ही महत्व है जिससे मनवांछित फल प्राप्त होती है।






















