– अदालतों को अपने फैसले सुनाने के लिए नागरिकों के मरने का इंतजार नहीं करना चाहिए
= यह उद्गार मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का है, जो नवंबर में सेवानिवृत्त हो जाएंगे
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 01नवंबर।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पिछले महीने जिला न्यायपालिका के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि बार-बार की तारीखों की संस्कृति वादियों, खासकर वंचित पृष्ठभूमि के लोगों के लिए तकलीफदेह है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को 32 साल बाद न्याय मिलेगा, तो उस व्यक्ति के जीवन में शायद ही कोई खुशी बचेगी।
हमें और आपको सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की मार्च वाली बात भी याद रखनी है।इसी साल मार्च में, CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि बार-बार की तारीखों की संस्कृति वादियों की पीड़ा को लम्बी खींचती है और बैकलॉग के चक्र को बढ़ावा देती है। अदालतों को अपने फैंसले सुनाने के लिए नागरिकों के मरने का इंतजार नहीं करना चाहिए। पिछले साल भी, CJI ने तारीखों के मुद्दे को उठाया था, और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को ‘तारीख पे तारीख’ वाली अदालत नहीं बनना चाहिए।
*न्याय में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए’*
लंबित पड़े़ मामलों और इससे जुड़े़ विभिन्न पहलुओं पर टिप्पणी करते हुए जौनपुर जिले के शाहगंज तहसील अंतर्गत सुरापुर बाजार निवासी अधिवक्ता जयकृष्ण पांडेय ने कहा कि इस आंकड़े़ में एक अच्छी बात यह है कि मामलों के निपटारे में तेजी आई है। हालांकि, लंबित पड़े मामलों के लिए सिर्फ वकीलों को दोष देना उचित नहीं है। किसी का प्रतिनिधित्व करने वाला वकील एक जिम्मेदारी निभाता है। साथ ही, एक वकील को अपनी रोजी-रोटी के लिए एक से ज्यादा मामले लेने पड़ते हैं। इस आंकड़े को सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए देखा जाना चाहिए, जैसे कि मामला दर्ज होने के बाद पूरी प्रक्रिया में क्या होता है। किसी मामले की तारीख आगे बढ़ाने के कई कारण होते हैं। और मैं कहूंगा कि न्याय में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए क्योंकि जल्दबाजी में किया गया न्याय, न्याय नहीं होता।
सीजीआई धनंजय चंद्रचूड़ के कार्यकाल में आए महत्वपूर्ण निर्णय
सीजीआई धनंजय चंद्रचूड़ ने एक बहुत बड़ा न्याय किया था:
इलेक्ट्रोल बांड पर। उन्होंने इस कानून को असंवैधानिक कर दिया! लेकिन, कंपनियों से हजारों करोड़ रुपये वसूलने वालों को सजा उन्होंने नहीं दी। वे सब आज भी माननीय हैं।
” न्याय मिलता हुआ दिखना भी चाहिए”।
यह बात कहने वाले सीजीआई चंद्रचूड़ स्वयं “निर्णय सुनाते समय ” न्याय देते हुए दिखाई पड़े क्या? उन्होंने इलेक्ट्रोल बांड कानून को असंवैधानिक होने का निर्णय सुनाया लेकिन इस बांड से वसूली गई राशि लौटाने का निर्णय नहीं सुनाया। इससे यह संदेश देश में गया कि असंवैधानिक कानून बनाना दंडनीय नहीं है। असंवैधानिक कानून बनाकर हजारों करोड़ रुपये चंदा लेना संवैधानिक है।
सीजीआई चंद्रचूड़ ने महाराष्ट्र सरकार को असंवैधानिक करार दिया। लेकिन,महाराष्ट्र की वह सरकार उसके बाद भी चलती रही। नवंबर 2024में पांच वर्ष का कार्यकाल महाराष्ट्र की असंवैधानिक सरकार पूरा करेगी। अर्थात असंवैधानिक सरकार भी संवैधानिक सरकार की तरह काम कर सकती है।
अयोध्या में मस्जिद भी बना।उसके लिए जमीन देनी पड़ी सीबीआई चंद्रचूड़ की आत्मा से निकला यह न्याय भारतीय इतिहास में सबसे महान न्याय कहलाएगा। क्योंकि इससे टकराव का समाधान हमेशा के लिए हो गया।
जमानत अधिकार है और जेल अपवाद है।यह कहना है देश के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का।
लेकिन ऐसा होता हुआ क्या दिखाई दिया।
न्यायालयों में न्याय रोता रहता है और बिना वैज्ञानिक साक्ष्य के जेल भेजने वाले न्यायालय की लताड़ सुनते रहते हैं।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सुरेन को ईडी बिना वैज्ञानिक साक्ष्य के जेल भेज दी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी 100करोड़ रुपये वसूलने के आरोप में जेल भेज दी। रुपये नहीं मिले। दोनों मुख्यमंत्रियों की पार्टी लोकसभा चुनाव उनके बिना लड़ती है।
नवंबर 2024में आ सकते हैं महत्वपूर्ण फैसले:
अभी दिवाली की छुट्टियों की वजह से सुप्रीम कोर्ट बंद है। अब अदालत 4 नवंबर को खुलेगा। सीजेआई चंद्रचूड़ की बेंच को 4 से 8 नवंबर तक कई बड़े मामलों में फैसला सुनाना है।क्योंकि 9 और 10 नवंबर को शनिवार और रविवार होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट बंद रहेगा।ऐसे में डीवाई चंद्रचूड़ के लिए 8 नवंबर सीजेआई के रूप में आखिरी दिन होगा।
पांच केस जिनका सीजेआई फैसला सुनाएंगे.
1. मदरसा एक्ट मामला
सीजेआई को जिन पांच मामलों में फैसला सुनाना है, उनमें यह सबसे अहम है। मदरसा एक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर को सुनवाई करके फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार 22 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को असंवैधानिक घोषित किया गया था।
2. AMU का माइनॉरिटी स्टेटस
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी स्टेटस को लेकर भी काफी समय से सुनवाई हो रही है
इस मामले में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की 7 जजों की पीठ ने आखिरी सुनवाई के दौरान फैसला सुरक्षित रखा था। अब देखना होगा कि सीजेआई एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने के पक्ष में हैं या इसके खिलाफ।
3 LMV लाइसेंस का मामला
LMV लाइसेंस मामले में आखिरी सुनवाई 21 अगस्त को हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस केस में विवाद यह है कि लाइटर मोटर व्हीकल के लाइसेंस धारकों को 7500 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले लाइट मोटर व्हीकल क्लास के परिवहन वाहन को चलाने की अनुमति है या नहीं।कोर्ट को यह तय करना है कि क्या हल्के मोटर वाहन लाइसेंस धारक को उसी कैटेगरी के परिवहन वाहन चलाने की अनुमति है या नहीं। इस मुद्दे के चलते ऐसे वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं से संबंधित बीमा दावों पर विवाद पैदा हो गया है।
4. दिल्ली के रिज एरिया में पेड़ों की कटाई
दिल्ली के रिज एरिया में पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में डाली गई थी।इसमें बताया गया था कि कैसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए पेड़ों की कटाई की गई।सीजेआई चंद्रचूड़ की बेंच को इस मामले में भी अहम फैसला सुनाना है।
5. संपत्ति का पुनर्वितरण
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की नौ जजों की की पीठ संविधान के अनुच्छेद 39(बी) पर भी सुनवाई कर रही है, जो आम भलाई के लिए संपत्ति के पुनर्वितरण से संबंधित है। संपत्ति के वितरण के संबंध में कांग्रेस ने इस राजनीतिक चर्चा को शुरू किया था उसी के बाद यह मामला कोर्ट में पहुंचा।






















