नजरिया न्यूज आकाश बाबा रानीगंज।
रानीगंज प्रखण्ड क्षेत्र खरहट वार्ड संख्या03 में दो दिवसीय विराट सन्तमत सत्संग ध्यान अधिवेशन का समापन सोमवार को हुआ।विराट सन्तमत सत्संग ध्यान अधिवेश में हरिद्वार से आये अंतराष्ट्रीय प्रवक्ता परम् पूज्य स्वामी सत्यानंद जी महाराज के प्रवचन सुनने के लिए काफी संख्या में सत्संग प्रेमी की भीड़ उमड़ पड़ी।सत्संग सुनने आये सत्संग प्रेमी में महिलाओं की भागीदारी काफी थी।पूज्य स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि संतमत का सौदा नगद सौदा होता है।सत्संग में सन्तों व गुरु के बातों पर विश्वास कर उनके कहे हुए बातों पर अमल करते हैं।और जो सत्संग में आते हैं वह पूण्य के पात्र होते हैं।सौदा पूण्य की सद्गुरु के सत्संग में ही अध्यान ज्ञान का सौदा सत्संग में कर सकते हो।सत्संग में सबुद्धि की प्राप्ति होती हैं।बहुत युवान भाई बहन जो अंडा,मांस,मछली का आहार करता था,सत्संग सुनने पर वह अंडा मांस,मछली का त्याग कर दिया।जो भोज्य पदार्थ नहीं है।मांस मछली खाने वाले व्यक्ति नरक की तैयारी में है।मांस मछली मनुष्य का भोजन नहीं है।जिस तरह शुरू से माता पिता की बातों को मानकर अपने जीवन को सजाया है। उसी तरह से गुरुजनों व ऋषियों की बातों को भी मानिए जीवन धन्य हो जायेगा।स्वामी विवेकानंद जी महाराज को देश ही नहीं पूरी दुनियां जानता है।यहाँ तक कि छोटे छोटे बच्चे भी जानते हैं।
बहुत मेघावी पुरुष थे।जबतक सदगुरु के शरण में महापुरुष नहीं गए तबतक आस पास के लोग ही उसे जानते थे की नरेंद्र एक मेघावी छात्र है।जिस दिन सद्गुरु के शरण में ग्रहण किए।सद्गुरु के आज्ञा में परिमार्जित कर लिए,अपने जीवन को धन्य बना लिया।तो नरेंद्र पूरी दुनिया में विख्यात हो गये स्वामी विवेकानंद के नाम से।संस्कृति व अध्यात्म का प्रचार स्वामी विवेकानंद जी महाराज पांच सात फॉरेन कँटी में ज्ञान देने की कृपा किया।उन्होंने कहा सत्संग मुक्ति का द्वार खोलता है।बिना सत्संग का जीवन अधूरा है।स्वामी मुक्तानंद महाराज,स्वामी विमलनन्द महाराज,स्वामी बोधा नंद महाराज,भालुक बाबा,जानी बाबा,नरेशानंद बाबा,रामा नंद बाबा,गणेश बाबा ने भी सत्संग में भाग लिया।अभिनंदन पत्र यमुना प्रसाद मण्डल,मंच संचालन संजय सत्यार्थी ने किया।इस सत्संग ध्यान अधिवेशन का संचालन सचिव कुंदन विश्वास,अध्यक्ष रणवीर कुमार मण्डल,मुखिया गनोरी मण्डल,पंचायत समिति सदस्य राजेश मण्डल सहित खरहट के समस्त पंचायत वासी व सत्संगिगण का कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम योगदान रहा।























