दुर्केश सिंह संपादकीय प्रभारी प्रभारी नजरिया न्यूज, 27मई।
इन दिनों सोशल मीडिया पर विमर्श के मुद्दों में एक सबसे बड़ा मुद्दा है भारत के गरीबों को गरीब बनाए रखने से किसको सबसे अधिक लाभ हो रहा है। लाभ, इतना अधिक है कि मीडिया के मालिक तक मुद्दों से आंख मूंद लिए हैं।
विश्व में सबसे अधिक पढ़ा जाना वाला एक हिंदी अखबार में एक दशक पहले संपादकीय पेज पर भरत झुनझुनवाला वाला का आलेख होता था कि सभी अनुदान रोककर देशवासियों को नगद भुगतान किया जाए तो प्रति नागरिक प्रतिमाह कितनी राशि दी जा सकती है। ऐसी पहली घोषणा लोकसभा चुनाव 2019 में राहुल गांधी ने की जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लपक लिया। किसान सम्मान निधि के सही उपयोग कैसे हो सकता है, यह जानते हुए भी देश ने नहीं किया। किसान सम्मान निधि और मनरेगा के बजट से भारत की प्रत्येक ग्राम पंचायत आत्मनिर्भर बन सकती है। विश्व के धनी देश शायद ऐसा नहीं चाहते?
सोशल एक्टिविस्ट राम उजागिर सिंह का कहना है:
किसान सम्मान निधि की राशि ग्राम पंचायत प्रधान को दिया जाए तो हर ग्राम पंचायत में वर्ष में दो नए ट्रैक्टरों की खरीदारी की जा सकेगी। खेत जोतने की लागत आधी से भी कम हो जाएगी।
श्री उजागिर सिंह ने कहा:
मनरेगा की राशि से ग्राम प्रधान खेती करवाएं तो सभी मजदूरों को प्रतिदिन 500रुपये मजदूरी दी जा सकती है। हर ग्राम पंचायत में एक दर्जन डेयरी फार्म खुल सकते हैं। दर्जनों बकरी फार्म खुल सकते हैं। सहकारी खेती हो सकती है। उन्होंने कहा:
हर युवा को प्रतिदिन एक हजार रुपये की नौकरी गांव में मिल सकती है। पूरा विश्व सामान खरीदने के लिए भारत में आएगा। इसीलिए विश्व के धनी देश भारत की ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर नहीं बनने दे रहे हैं।
कुछ ऐसी ही बात मीडिया से बातचीत में सुप्रीम कोर्ट के एक्स न्यायविद मार्कडेय काटजू भी कहते हैं:



















