सात वर्षों से लोग झेल रहे हैं बाढ़ कटाव का दंश।
नजरिया न्यूज बारसोई कटिहार।
बिघोर क्षेत्र के सात पंचायत को बारसोई से जोड़ने की पुरानी मांग को सरकार द्वारा पुरा तो किया गया। इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च भी हुए परन्तु अब भी सड़क पर यातायात करना काफी संघर्ष पूर्ण है। इतना ही नहीं बिघोर हाट से महेशपुर तक बड़ी गाड़ी का परिचालन नहीं होता है। जिसके चलते पुरा सड़क बेकार है। बताते चलें कि बिघोर हाट को बारसोई से जोड़ने के लिए महेशपुर गांजन घाट के बीच महानंदा नदी पर करोड़ों की लागत से 2015 के बाद करोड़ों की लागत से उच्च स्तरीय पुल का निर्माण होने के बाद दोनों तरफ से सड़क भी बनाए गए परंतु एक तरफ जहां 2017 के बाढ़ में केकरा मनी के कर्लभट के बीच का पाया धंस जाने से कर्लभट टेढ़ा-मेढ़ा हो गया है। और 7 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक जस की तस स्थिति बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ गांजन पुल के दोनों तरफ एप्रोच सड़क का निर्माण सही ढंग से नहीं होने के चलते बड़ी गाड़ियों का परिचालन नहीं हो पता है। केकरा मनी में किसी तरह छोटी गाड़ियां पार होती है इतना ही नहीं जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टर वाले और ऑटो वाले गाड़ी निकलते हैं।
इतना खर्च होने के बाद भी उक्त महत्वपूर्ण संपर्क सड़क को सुलभ और सरल नहीं बनाया जा सका। । यह बहुत ही दुख की बात है। यहां बता दे की उक्त सड़क पश्चिम बंगाल से बारसोई को सीधे तौर पर जोड़ती है। तथा बिघोर क्षेत्र के सात पंचायत के लाखों की आबादी इसी सड़क से मुख्यालय तक आती जाती है। फिर भी निजी वाहन, दो पहिया वाहन, पैदल, साइकिल या तिपहिया वाहन के अलावे अन्य दूसरी कोई व्यवस्था नहीं है। उक्त सड़क से किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। बिघोर क्षेत्र का बाजार खराब सड़क के चलते पूरी तरह से आजाद नहीं हो पा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों ने केकरा मनी के कर्लभट को दुरुस्त करने और गांजन पुल के दोनों तरफ एप्रोच को सही ढंग से बनाने की मांग की है।





















