भरगामा।
मनुष्य ईश्वर भक्ति के सनातन पुरातन मार्ग को छोड़कर मनमाना आचरण करने लगता है तो इससे धर्म के संबंध में अनेक भ्रांतियां फैली है :- आचार्य रुचिर शास्त्री जी महाराज
सोमवार को सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ के चौथे दिन बादलों की लुकाछिपी व बुंदाबांदी के बीच कथा सुनने महिला पुरूष व आसपास के जिला से श्रद्धालुओं की भीड उमड पडी।
भरगामा प्रखंड श्री राम जानकी ठाकुरबाडी परिसर में श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ को लेकर आसपास के क्षेत्र के लोगों खासकर युवाओ में खासा उत्साह का माहौल देखा गया। फलस्वरूप दूर दराज से आनेवाले संत, महात्माओं और श्रद्धालुओं के ठहरने और कथा सुनने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी में शुरू हुए श्रीमद्भागवत कथावाचन 23 मई तक चलेगा। यज्ञ को लेकर बड़े व आकर्षक पंडाल बनाए गए है। हलांकि रविवार देर रात हल्की बारिश के कारण कार्यक्रम स्थल पर थोड़ा-बहुत जल जमाव देखा गया जिसे स्थानीय ग्रामीण के द्वारा मिट्टी डालकर ठीक कर दिया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अलग-अलग कमेटी बनाया गया है। आयोजन कमेटी के सदस्यों ने बताया कि महायज्ञ में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर प्रेमदास जी महाराज उर्फ मोनीबाबा और
श्रीमद्भागवत कथा के मुख्य कथावाचक श्रीधाम वृंदावन के आचार्य रुचिर शास्त्री जी महाराज ने अपने कथावाचन में प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ज्ञान रूपी दीपक प्रत्येक व्यक्ति में विराजमान हैं। जो भागवत कथा के ज्ञान के श्रवण से प्राप्त होती हैं। कहा कि भगवान श्री कृष्ण के अंतिम समय उद्धव ने प्रश्न किया कि प्रभु आप इस संसार से जा रहे हैं। अब भक्तगण आपका दर्शन कैसे करेंगे। भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि भक्तों मेरा दर्शन मेरे नाम, मेरे धाम, मेरे ग्रंथ में कर सकते हैं ।
इसी को चरितार्थ करने के लिए श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जाता हैं। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि जब मनुष्य ईश्वर भक्ति के सनातन पुरातन मार्ग को छोड़कर मनमाना आचरण करने लगता है तो इससे धर्म के संबंध में अनेक भ्रांतियां फैल जाती है। धर्म के नाम पर विद्वेष , लड़ाई झगड़ा , भेदभाव , गलत आचरण होने लगता है । तब प्रभु अवतार लेकर इन बाह्य आडंबरों से त्रस्त मानवता में ब्रह्म ज्ञान के द्वारा प्रत्येक मनुष्य के अंदर वास्तविक धर्म की स्थापना करते हैं। श्रद्धालुओं को उत्तम जी महाराज ने भी श्रीमद्भागवत कथावाचन का रसपान कराया। कथा प्रवचन से पुरे गांव का माहौल भक्तिमय हो गया है।
कथावाचन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय श्यामानंद सिंह,समाजसेवी ओमप्रकाश कुंवर टार्जन, अनमोल कुंवर , निर्मल सिंह,लोकगायक प्रदीप सिंह, मनीष कुमार सिंह,कमलदेव डीलर, इन्द्रानंद कूंवर, प्रमोद कुमार सिंह, निरूपम सिंह, संजीव कुमार, रविंद्र यादव, रौशन कुमार सिंह, प्रशांत कुमार, अभय शंकर कुमार शर्मा, नीतीश कुमार सिंह,गिरजानंद भगत एवं समस्त शंकरपुर वासी जोर-शोर से जुटे हुए हैं।





















