कागज पर ‘कत्ल’, डिजिटल डकैती और खाकी का पहरा!
- बर्बाद गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी था,
हर शाख पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा? - जब रक्षक ही बन जाएं भक्षक, और कलम ही बेचे ईमान,
- तब कागजों की इस डकैती में रोता है मजबूर किसान!
नजरिया न्यूज़ फुलकाहा (अररिया)। बिहार के अररिया जिले से सत्ता, स्याही और साजिश की एक ऐसी सनसनीखेज दास्तान सामने आई है, जिसने पूरे सूबे के प्रशासनिक गलियारे को हिलाकर रख दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां कलम के बाजीगरों ने दफ्तर के बंद कमरों में बैठकर एक गरीब और लाचार बुजुर्ग किसान की पुश्तैनी जमीन का डिजिटल ‘कत्ल’ कर दिया। फुलकाहा थाना अंतर्गत मौजा-डुमरिया के रहने वाले 66 वर्षीय बुजुर्ग किसान बैद्यनाथ बहरदार की करीब 2 एकड़ 26 डिसमिल जमीन पर ऐसा ‘सरकारी डाका’ डाला गया कि सुनने वालों के होश उड़ जाएं। एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन-तीन अंचलाधिकारी (CO), तीन राजस्व कर्मचारी और इलाके के नामी भू-माफियाओं समेत कुल 55 श्वेतपोश अपराधियों के खिलाफ फुलकाहा थाना में कांड संख्या 148/26 के तहत एफआईआर दर्ज हो चुकी है। अररिया के पुलिस कप्तान (SP) जितेन्द्र कुमार के कड़े तेवरों ने साफ कर दिया है कि खाकी अब इन भ्रष्ट अधिकारियों और भू-माफियाओं के सिंडिकेट को बख्शने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
साजिश का डिजिटल चक्रव्यूह: जब सरकारी ‘डोंगल’ बना डकैती का हथियार
कहते हैं कि चोर जब चोरी करता है तो कोई न कोई सुराग छोड़ जाता है, लेकिन यहाँ तो सरकारी नुमाइंदों ने खुद ही सुरागों की मीनार खड़ी कर दी। बुजुर्ग किसान बैद्यनाथ बहरदार की खतियानी जमाबंदी संख्या 270, 270A और 1665 को निशाना बनाया गया। अंचल कार्यालय नरपतगंज के पूर्व और तत्कालीन हुक्मरानों ने भ्रष्टाचार की गंगा में इस कदर डुबकी लगाई कि बिना किसी न्यायालय या वरिष्ठ अधिकारी के आदेश के, रातों-रात ऑनलाइन पोर्टल पर कूट-रचना (फर्जीवाड़ा) कर डाली।
- कलम की नोक से जो लिख देते हैं किस्मत गरीबों की,
- उन्हें क्या इल्म कि क्या कीमत है इन सूखी जमीनों की।
- सरकारी डोंगल से खेला ऐसा खूनी डिजिटल खेल,कि
- सीधे साधे किसानों को अब दिखने लगी है जेल।
रिकॉर्ड बताते हैं कि तत्कालीन सीओ शम्भू प्रकाश, अंचलाधिकारी उत्तम राहुल और राजस्व कर्मी जितेन्द्र कुमार राय, जमीउर रहमान तथा रेणु कुमारी ने डिजिटल ‘डकैती’ की सारी हदें पार कर दीं। दिनांक 15/09/2023 को दिन के करीब 01:54 बजे, इन सरकारी बाबुओं ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर बिना किसी वैध दस्तावेज के खाता-270, खेसरा-1799, 1798 और 1207 के रकबे में हेरफेर किया। इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए सरकारी ‘डोंगल’ (डिजिटल सिग्नेचर) का इस्तेमाल कर दिनांक 21/06/2025 और 23/06/2026 को मृत व्यक्तियों और अन्य भू-माफियाओं के नाम पर जमीन को ऑनलाइन चढ़ा दिया गया, जो अंचल कार्यालय के मूल अभिलेखों से पूरी तरह गायब है।
- 300-400 लठैत, कट्टे-पिस्तौल और लहलहाती फसल पर ट्रैक्टर का तांडव
जब कागजी जालसाजी से भी किसान का हौसला नहीं टूटा और उसने माननीय भूमि उप समाहर्ता (DCLR) फारबिसगंज के न्यायालय से अपने पक्ष में आदेश करा लिया, तो भू-माफिया तिलमिला उठे। उन्होंने कानून की लाठी को ठेंगे पर रखकर बारूद और बंदूकों का सहारा लिया। पीड़ित बैद्यनाथ बहरदार के अनुसार, इलाके के खूंखार माफिया योगानंद बहरदार, वंदेश्वरी बहरदार, नित्यानंद बहरदार, मो. इमरान, मो. एकलाख और मो. असगर के नेतृत्व में करीब 300 से 400 अज्ञात हथियारबंद अपराधियों और लठैतों ने पीड़ित के खेत पर धावा बोल दिया।
वारदात का खौफनाक मंजर: पीड़ित की जुबानी
“हाथों में चमचमाती पिस्तौलें, देसी कट्टे, लाठियां, भाले और तलवारें लिए वह भीड़ मेरी लहलहाती फसल को जबरन ट्रैक्टर से जोतने लगी। जब मैंने विरोध किया, तो मो. इमरान ने अपनी कमर से पिस्तौल निकालकर सीधे मेरी छाती पर तान दी और जान से मारने की नीयत से गोली चला दी! भगवान का शुक्र था कि मैं ऐन वक्त पर झुक गया और गोली मेरे पेट के बगल से सरसराती हुई निकल गई। मो. एकलाख और मो. असगर हाथों में कट्टा लहराते हुए मुझे दौड़ाने लगे। मैंने किसी तरह भागकर बांस की झाड़ियों में छिपकर अपनी जान बचाई।”
इस खौफनाक तांडव का एक वीडियो साक्ष्य भी पेनड्राइव में सुरक्षित कर पुलिस को सौंपा गया है। घटना की सूचना जब आपातकालीन नंबर 112 पर दी गई, तब जाकर पुलिस की भनक पाकर ये कायर भू-माफिया और भाड़े के गुंडे हवाई फायरिंग करते हुए भाग खड़े हुए।
कप्तान के कड़े तेवर: अब नपेंगे ‘साहब’ और सलाखों के पीछे होंगे ‘माफिया’
इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद अररिया के पुलिस अधीक्षक (SP) जितेन्द्र कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद कमान संभाल ली है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा है कि जमीन के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा और ऑनलाइन पोर्टल पर रिकॉर्ड से छेड़छाड़ एक अक्षम्य अपराध है। इस मामले में संलिप्त तीनों अंचलाधिकारियों (CO), तीनों राजस्व कर्मियों और सभी 49 नामजद भू-माफियाओं के खिलाफ गहन अनुसंधान शुरू कर दिया गया है।
- न्याय की चक्की चलेगी जरूर, भले ही उसकी रफ्तार धीमी हो,
- सलाखों के पीछे जाएंगे वो सब, जिनकी नीयत में बेईमानी हो।
- अब न तो कोई ‘साहब’ बचेगा, न कोई रसूखदार माफिया,
- अररिया पुलिस लिखेगी अब अपराधियों का नया मर्सिया!
अदालत की चौखट से लेकर पुलिस के दफ्तर तक, यह मामला पूरे बिहार में नजीर बनने जा रहा है। पीड़ित बुजुर्ग किसान ने अपने आवेदन के साथ खतियान की प्रति, बटाईदारी वाद के आदेश, और ऑनलाइन कूटरचित जमाबंदी की प्रतियों समेत 12 पुख्ता सबूत नत्थी किए हैं। अब देखना यह है कि कानून के लंबे हाथ इन सफेदपोश अपराधियों के गिरेबान तक कितनी जल्दी पहुँचते हैं और पीड़ित बैद्यनाथ बहरदार को उनकी पुश्तैनी जमीन पर न्याय का हक कब मिलता है।
फर्जीवाड़ा करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, अररिया पुलिस का है साफ पैगाम!



















