नजरिया न्यूज़, अररिया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) के निर्देश पर बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में 100 दिवसीय विशेष कार्य योजना के अंतर्गत व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना तथा इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास को मजबूत करना है।
अभियान के दौरान आमजन को यह स्पष्ट रूप से बताया जा रहा है कि बाल विवाह कानूनन अपराध है। 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका तथा 21 वर्ष से कम उम्र के बालक का विवाह कराना या इसमें किसी भी प्रकार का सहयोग करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इस अपराध में शामिल पंडित, मौलवी, नाई, टेंटवाले, हलवाई या अन्य कोई भी व्यक्ति कानून के दायरे में आएगा और उसे सजा भुगतनी पड़ सकती है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के सामाजिक, शैक्षणिक एवं सर्वांगीण विकास में गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। कम उम्र में विवाह होने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है, जिससे उनका स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता प्रभावित होती है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति का यह नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह बाल विवाह को रोकने में सहयोग करे।
अभियान के तहत यह भी अपील की गई कि यदि कहीं भी बाल विवाह होते हुए प्रतीत हो, तो उसकी सूचना तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा विधिक सेवा हेल्पलाइन 15100 पर दें। समय पर दी गई सूचना से किसी बच्चे या बच्ची का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।
अंत में सभी से संकल्प लेने की अपील की गई कि वे न केवल स्वयं बाल विवाह से दूर रहेंगे, बल्कि अपने आसपास भी इस कुप्रथा को पनपने नहीं देंगे। सामूहिक जागरूकता और सहभागिता से ही पूरे भारत को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है।























