बारसोई (कटिहार)
शिवानंदपुर पंचायत के मुखिया नियाज अहमद अंसारी को गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने और चार वर्षों तक पद पर बने रहने के मामले में बिहार राज्य निर्वाचन आयोग, पटना ने पद से हटाने का आदेश पारित किया है। यह आदेश ज्ञापन संख्या 4069, दिनांक 17 अक्टूबर 2025 तथा वाद संख्या 83/2022 के तहत जारी किया गया है।
मामला कैसे बढ़ा?
मथुरापुर निवासी जहरूल इस्लाम ने आरोप लगाया था कि नियाज अहमद अंसारी बिहार राज्य के मूल निवासी नहीं हैं।उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाकर अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 (इबीसी1) के आरक्षित पद पर चुनाव लड़ा।जबकि खतियान में उनकी जाति के स्थान पर केवल “मुसलमान” अंकित है। जांच के दौरान विवाद जटिल होने पर आयोग ने प्रकरण को राज्य स्तरीय कास्ट स्क्रूटनी समिति, निदेशालय भेजा। समिति ने विस्तृत जांच के बाद नियाज अहमद अंसारी के जाति प्रमाण पत्र को अवैध घोषित कर दिया।
अदालत का रास्ता और आयोग का फैसला
मुखिया अंसारी ने इस आदेश के विरुद्ध पटना उच्च न्यायालय में वाद दायर कर स्टे ऑर्डर प्रस्तुत करते हुए कास्ट समिति से कार्रवाई रोकने की मांग की, परंतु उच्च न्यायालय की ओर से कोई नया आदेश पारित नहीं हुआ।
इसके बाद चुनाव आयोग ने कास्ट स्क्रूटनी समिति के पूर्व आदेश को प्रभावी मानते हुए अपना अंतिम निर्णय सुना दिया।
किस पर होगी कार्रवाई?
निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है—मुखिया नियाज अहमद अंसारी की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने, चार वर्षों तक गलत ढंग से पद पर बने रहने के मामले में उनके विरुद्ध कार्रवाई करने, फर्जी जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने में शामिलअंचल पदाधिकारी तथा हल्का कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करना शामिल है।
अगले आदेश तक वित्तीय लेनदेन पर रोक
प्रखंड विकास पदाधिकारी चन्दन प्रसाद ने बताया कि प्राप्त पत्रावली को मुखिया से तमिला कराकर मार्गदर्शन हेतु जिला भेज दिया गया है। जिला से स्पष्ट आदेश मिलते ही आगे की कार्रवाई होगी।
तब तक पंचायत सचिव को निर्देश दिया गया है कि शिवानंदपुर पंचायत के सभी वित्तीय लेन-देन पर रोक रहेगी।























