रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का 126वाँ संस्करण देशभर में उत्साहपूर्वक सुना गया। अररिया के ठाकुरबारी दुर्गा पूजा पंडाल में भी श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक एकत्रित होकर प्रधानमंत्री जी के प्रेरक विचारों को ध्यानपूर्वक सुने।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए कहा कि देश की प्रगति और समाज की मजबूती में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि महिलाओं को समान अवसर और सम्मान देकर देश को नई ऊँचाइयों पर ले जाया जा सकता है। यह संदेश ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को नई दिशा देता है।
प्रधानमंत्री ने आगे ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ अभियान पर जोर देते हुए लोगों से स्थानीय उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग से न केवल देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों, किसानों और लघु उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। यह विचार ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा को बल देता है और युवाओं को नवाचार तथा उद्यमिता की ओर प्रेरित करता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आगामी त्यौहारों — दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और इन पर्वों को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया।
अररिया में आयोजित इस सामूहिक श्रवण कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों के साथ कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें भाजपा नेता एवं उद्यमी तथा बिहार राज्य व्यापार आयोग के सदस्य आलोक कुमार भगत, भाजपा नेता नवीन यादव, सुधीर भगत, पंडित कृष्णकांत तिवारी, रंजन राय, प्रदीप तिवारी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। सभी ने प्रधानमंत्री के विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायक और देशहित में बताया।
स्थानीय लोगों का कहना था कि प्रधानमंत्री के संदेश से हमें न केवल त्यौहारों को उत्साह से मनाने की प्रेरणा मिलती है, बल्कि समाज में महिलाओं की गरिमा, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और सामूहिक विकास की भावना को भी बढ़ावा मिलता है।
इस अवसर पर अररिया के युवाओं और महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देंगे और महिला शिक्षा तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित करने में सहयोग करेंगे।
प्रधानमंत्री का यह संदेश त्योहारों की उमंग के बीच सामाजिक समरसता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।























