नजरिया न्यूज़, पूर्णिया। मलय कुमार झा।
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, पूर्णिया के संबंध में सोशल मीडिया पर फैलाई गई भ्रामक खबरों को लेकर अस्पताल प्रशासन ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वायरल की गई खबर पूरी तरह से तथ्यहीन, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण है, जिसका उद्देश्य अस्पताल एवं चिकित्सकों की छवि को धूमिल करना है।
शनिवार, दिनांक 16 अगस्त 2025 को अपराह्न करीब 3:15 बजे डायल 112 की पुलिस द्वारा सड़क दुर्घटना (Road Traffic Accident) में घायल तीन मरीजों को अस्पताल लाया गया। जांच के उपरांत चिकित्सकों ने दो मरीजों को मृत घोषित कर दिया जबकि तीसरे मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। उसे “गैस्पिंग” की स्थिति में लाया गया था, जिसके लिए तत्काल चिकित्सा टीम ने पूरा प्रयास किया। हालांकि, गहन उपचार और अथक प्रयासों के बावजूद मरीज को बचाया नहीं जा सका।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, परिजनों के आग्रह पर सभी मृतकों को विधिवत रूप से पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। लगभग शाम 4:45 बजे पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू हुई। इसी क्रम में, जब एक मृतक का पोस्टमार्टम पूरा हो चुका था और दूसरे का होना बाकी था, उसी दौरान परिजनों ने तीसरे मृतक के शरीर पर दबाव डालते हुए छाती को दबाया। इससे मृतक के शरीर से आंतरिक रक्त-श्राव बाहर आया, जिसे देखकर परिजनों ने भ्रमवश दावा किया कि मरीज अभी भी जीवित है।
इस अफवाह के फैलते ही मौजूद भीड़ उग्र हो गई और मृतक को ट्रॉली समेत आपातकालीन कक्ष की ओर खींचते हुए ले गई। रास्ते में उत्तेजित भीड़ ने चिकित्सकों के खिलाफ हिंसक नारों का प्रयोग किया, यहाँ तक कि डॉक्टरों को जान से मारने, जला देने और अस्पताल में आग लगाने की धमकी भी दी। आपातकालीन कक्ष में पहुँचने के बाद पुनः चिकित्सकों ने मृतक की जांच की और विधिवत मृत घोषित कर दिया। तत्पश्चात शव को वापस पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पूरी घटना का वीडियो साक्ष्य मौजूद है, जिसे संबंधित थाना को उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके बावजूद कुछ स्थानीय यूट्यूबर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय व्यक्तियों ने जानबूझकर भ्रामक शीर्षक “पूर्णिया मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जिंदा व्यक्ति का कर रहे थे पोस्टमार्टम, चीड़फाड़ से पहले ही लेने लगा सांस” लगाकर इसे वायरल कर दिया।
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, पूर्णिया ने इस खबर का पूरी तरह से खंडन किया है और कहा है कि यह समाज को गुमराह करने और संस्थान की साख खराब करने का प्रयास है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें और तथ्यहीन प्रचार करने वालों से सतर्क रहें।























