नजरिया न्यूज अररिया।विकाश प्रकाश। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन अररिया ने एक समारोह का आयोजन किया है, जिसमें जिले की तीन प्रतिभाशाली महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा।
इन तीन महिलाओं में इंदु देवी, प्रज्ञा कुमारी और निर्जला कुमारी शामिल हैं। ये तीनों महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं और समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए काम कर रही हैं।
स्टोरी-01:
इंदु देवी – एक सशक्त महिला की कहानी
अररिया जिले की इंदु देवी ने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी कहानी एक सशक्त महिला की कहानी है, जिन्होंने अपने जीवन को सुधारने के लिए कड़ी मेहनत की और आज वह एक सफल उद्यमी हैं।
इंदु देवी ने वर्ष 2022 में जीविका से जुड़कर समाज में व्याप्त कुरीतियों, जैसे बाल विवाह, दहेज प्रथा और नशाखोरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
वर्तमान में, इंदु देवी दीप जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ की अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में सदर अस्पताल, अररिया में “दीदी की रसोई” का सफल संचालन किया जा रहा है, जहां प्रतिदिन औसतन 130 मरीजों के भोजन की व्यवस्था की जाती है। उनके उत्कृष्ट प्रबंधन के चलते, “दीदी की रसोई ने अब तक ₹5.50 लाख का मुनाफा अर्जित किया है।
स्टोरी-02:
प्रज्ञा कुमारी: एक कलाकार की अनोखी कहानी
प्रज्ञा कुमारी का बचपन से ही रंगों और चित्रों के प्रति गहरा लगाव था। वह अपनी कल्पनाओं को कागज़ पर उकेरने में मग्न रहती थी। स्कूल और कॉलेज में आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिताओं में वह हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त करती रही, जिससे उसकी कला के प्रति रुचि और भी गहरी हो गई।
प्रज्ञा कुमारी ने भगवान शिव के दिव्य स्वरूप को 2100 स्क्वायर फीट के विशाल कैनवास पर उकेरने का निश्वय किया। यह कोई साधारण कार्य नहीं था, क्योंकि उसके गांव में संसाधनों की कमी थी और आर्थिक कठिनाइयां भी सामने थी। लेकिन प्रज्ञा ने हार नहीं मानी और अपनी इस महत्त्वाकांक्षी योजना को साकार करने के लिए ट्यूशन पढ़ाकर आवश्यक सामग्री जुटाई और दिन-रात कड़ी मेहनत करने लगी।
छह महीने की अथक परिश्रम के बाद, उसने वह असाधारण पेंटिंग तैयार की, जिसे देखकर हर कोई अचंभित रह गया। यह पेंटिंग न केवल आकार में विशाल थी, बल्कि इसकी कलात्मकता भी अद्वितीय थी। यह एक ऐसा कीर्तिमान था, जिसे पहले कभी किसी ने स्थापित नहीं किया था।
प्रज्ञा कुमारी की यह अनोखी कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर हम अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करें और हार न मानें, तो हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। प्रज्ञा कुमारी की यह कहानी हमें प्रेरित करती है कि हम अपने जीवन में भी ऐसी ही अनोखी और अद्वितीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
स्टोरी-03:
निर्जला कुमारी – एक साहसी लड़की की कहानी
अररिया जिले की एक लड़की ने बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाते हुए इसे जिला प्रशासन के सहयोग से रूकवाने का जीता जागता उदाहरण पेश किया है। अररिया जिला अंतर्गत पलासी प्रखंड के धर्मगंज, भट्टाबाड़ी, वार्ड संख्या-11 निवासी निर्जला कुमारी का बाल विवाह कराया जा रहा था।
लेकिन निर्जला कुमारी ने हार नहीं मानी और अपने बाल विवाह को रोकने के लिए जिला प्रशासन की मदद ली। उन्होंने जिला प्रशासन को सूचित किया और अपने बाल विवाह को रोकने के लिए मदद मांगी। जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और निर्जला कुमारी का बाल विवाह रोक दिया गया।
निर्जला कुमारी ने अपने इस साहसिक कदम के बारे में बताया कि वह अपने जीवन को सुधारने के लिए किसी भी कीमत पर तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक बड़ी समस्या है और इसे रोकने के लिए हमें एकजुट होना होगा।
निर्जला कुमारी की इस साहसिक कहानी ने पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है। लोग उनकी बहादुरी और साहस की प्रशंसा कर रहे हैं। निर्जला कुमारी की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर हम अपने अधिकारों के लिए लड़ें तो हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।
निर्जला कुमारी ने अब अपने गांव में एक टीम बनाई है जो बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए काम कर रही है। वह अपने गांव के लोगों को बाल विवाह के खतरों के बारे में बता रही हैं और उन्हें अपने बच्चों को शिक्षा देने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
निर्जला कुमारी की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर हम अपने समाज को सुधारने के लिए काम करें तो हम एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।























