नजरिया न्यूज। भरगामा। जीतू दास।
*मधुमक्खियों का संरक्षण बढ़ाएगा परागण, कीट और रोग प्रबंधन से होगा बेहतर उत्पादन*
भरगामा प्रखंड सहित आसपास के इलाकों में आम और लीची के पेड़ मंजरों से लद चुके हैं। वातावरण सुगंधित हो गया है और किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। उन्नत किसान गुड्डू यादव, सुदेश यादव, मुन्ना यादव, सुनील सिंह और रणधीर सिंह बताते हैं कि इस वर्ष पेड़ों पर अच्छी मात्रा में मंजर आए हैं, जिससे बंपर पैदावार की संभावना है। यदि मौसम अनुकूल रहा, तो किसानों को अच्छा मुनाफा होगा।
फरवरी के दूसरे सप्ताह से आते हैं मंजर
प्रखंड उद्यान पदाधिकारी प्रणव आनंद के अनुसार, आम और लीची में मंजर फरवरी के दूसरे सप्ताह से आना शुरू हो जाता है। इसका समय प्रजाति और तापमान पर निर्भर करता है। इस साल जनवरी में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने के कारण मंजर आने में थोड़ी देरी हुई है। उन्होंने बताया कि यह साल आम के लिए ‘ऑन ईयर’ है, जिसका अर्थ है कि इस वर्ष बेहतर उत्पादन की संभावना है।
बेहतर उत्पादन के लिए अपनाएं ये उपाय
1. परागण बढ़ाने के लिए मधुमक्खियों का संरक्षण जरूरी
परागण के लिए मधुमक्खियों और सिरफिड मक्खियों की उपस्थिति आवश्यक है। लीची के बाग में प्रति हेक्टेयर 20-25 मधुमक्खी बॉक्स रखने से परागण बेहतर होता है और शहद उत्पादन भी बढ़ता है। फूल खिलने के दौरान कीटनाशक का छिड़काव न करें, क्योंकि इससे मधुमक्खियों को नुकसान हो सकता है।
फोटो परिचय : लीची के पेड पर लदे मंजर
2. कीट प्रबंधन
मिलीबग (गुजिया कीट) से बचाव:
बाग की सफाई करें और क्लोरपायरीफास 1.5 डी धूल (250 ग्राम प्रति पेड़) का प्रयोग करें।
मुख्य तने के चारों ओर एल्काथीन की 45 सेमी चौड़ी पट्टी लगाएं, ताकि कीट पेड़ पर न चढ़ सकें।
यदि कीट पहले से पेड़ पर चढ़ चुका है, तो डायमेथोएट 30 ई.सी. या क्विनाल्फोस 25 ई.सी. (1.5 मिली प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें।
3. रोग प्रबंधन
ब्लॉसम ब्लाइट (फूलों के काले पड़ने की समस्या):
हेक्साकोनाजोल @ 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
पाउडरी मिल्ड्यू (खर्रा रोग):
मंजर आने से पहले घुलनशील गंधक (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें।
यदि अब तक छिड़काव नहीं किया गया है, तो फल बनने के बाद हेक्साकोनाजोल (1 मिली प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें।
4. टिकोलों (छोटे फलों) को गिरने से बचाने के उपाय
प्लेनोफिक्स (1 मिली प्रति 3 लीटर पानी) का छिड़काव करें।
फल बनने के बाद नियमित सिंचाई करें, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।
5. सिंचाई का सही तरीका
फूल खिलने के दौरान सिंचाई न करें, अन्यथा फूल झड़ सकते हैं।
जब फल मटर के दाने के आकार के हो जाएं, तब सिंचाई शुरू करें।
मिट्टी को पूरी तरह सूखने न दें, इससे टिकोलों के झड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
इस बार बंपर उत्पादन की उम्मीद
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसानों ने सही प्रबंधन अपनाया और मौसम अनुकूल रहा, तो इस साल आम और लीची की फसल से अच्छी पैदावार होगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे कीटनाशकों और उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करें, ताकि अधिक से अधिक गुणवत्ता युक्त उत्पादन मिल सके।























